'वह हमारी हीरो थीं। वह न होतीं तो हम आज जिंदा नहीं होते। हैवानों ने उन्हें जिंदा जला डाला।' पेशावर के आर्मी स्कूल से बच कर निकले इरफानुल्लाह उस लम्हे को याद कर सिहर उठे।
मंगलवार को तालिबान के आतंकियों ने पेशावर के आर्मी स्कूल में अंधाधुंध फायरिंग कर 132 बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। मरने वालों में स्कूल के टीचर और स्टाफ के नौ लोग भी शामिल थे। आतंकियों ने कक्षाओं में घुसकर मासूम बच्चों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। एक क्लास में जब टीचर ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो आतंकियों ने उन्हें जिंदा जला दिया।
वह इरफानुल्लाह की टीचर आफशा अहमद थीं, जिनकी उम्र महज 24 साल थीं। पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में भर्ती में इरफानुल्लाह ने बताया कि अगर आफशा न रही होतीं तो वह भी मर चुके होते। वह आतंकियों और बच्चों के बीच में दीवार की तरह खड़ी हो गईं थीं।(साभार: न्यूजवीक)