कोयला आवंटन को लेकर संसद का मानसून सत्र भले ही हंगामे की भेंट चढ़ गया हो, लेकिन राजग संयोजक और जदयू प्रमुख शरद यादव ने साफ कर दिया है कि इस बार उनकी पार्टी संसद का बहिष्कार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि संसद का पिछला सत्र न चल पाना अफसोसजनक था, लेकिन शीतकालीन सत्र सुचारु रूप से चलेगा और एक दिन भी कामकाज नहीं रुकेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शीत सत्र पूरे समय चलना चाहिए ताकि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सके।
शरद यादव के अनुसार शीत सत्र में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की जा सकती है, लेकिन इस बात पर अड़ा नहीं जाएगा और इस मुद्दे पर समूचे विपक्ष सहित अन्य दलों के बीच सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि वह प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगने के पक्ष में कभी भी नहीं थे। यादव के अनुसार मैं मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग से सहमत नहीं हूं पर अगर कोई संप्रग सरकार को पूरी तरह हटाने की बात करता है तो मैं उसके साथ हूं।
यादव ने अरविंद केजरीवाल पर भी हमला बोलते हुए कहा कि वह व्यक्तिगत मुद्दों को हवा देकर देश की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटका रहे हैं। शरद ने केजरीवाल को राबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच की साठगांठ को लेकर कोर्ट जाने की नसीहत दी। जदयू प्रमुख ने टीम केजरीवाल की आलोचना करते हुए कहा कि व्यक्तिगत हमलों से देश का विकास नहीं हो सकता।
वहीं प्रेस कांफ्रेंस में कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के व्यवहार पर यादव बोले, जिस तरह खुर्शीद ने बर्ताव किया, उससे मैं हैरान रह गया। मैंने कभी राजनीति का स्तर इतना गिरते हुए नहीं देखा। मुझे खुर्शीद का व्यवहार देखकर शर्म आती है। यादव ने खुर्शीद की पत्नी के एनजीओ में हुए घोटाले को देखते हुए देश के सभी एनजीओ के कामकाज की जांच कराने की भी मांग की है।
राजग संयोजक ने कहा कि संप्रग सरकार-2 के कार्यकाल में पिछले तीन-चार साल में साढ़े पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले हुए। उसके सामने सलमान खुर्शीद और डीएलएफ-वाड्रा का घोटाला बहुत कम है।