लोकसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है, लेकिन इससे अलहदा भी राजनीति और नेता नई-नई करवट ले रहे हैं।
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यूपीए सरकार की अहम सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने मनमोहन सिंह के बयान पर सलाह दे डाली है। पार्टी अध्यक्ष शरद पवार का कहना है कि मोदी पर बोलते हुए मनमोहन को सही शब्दों का चयन होना चाहिए।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाल में कहा था कि अगर नरेंद्र मोदी देश का प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह देश के लिए विनाशकारी साबित होगा। उन्होंने कहा था अगर मजबूत होने का मतलब सड़कों पर कत्लेआम कराना है, तो मुझे ऐसा न होने पर खुशी है।
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अपशब्दों का इस्तेमाल न होः पवार
भाजपा ने मनमोहन सिंह के इस बयान पर करारा पलटवार किया था। लेकिन अब कांग्रेस के साथी भी मनमोहन के खिलाफ बोल रहे हैं। इसी कड़ी में शरद पवार ने कहा कि है कि किसी को भी अपशब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
शरद पवार का कहना है कि वह कभी भी किसी के बारे में बात करते वक्त गलत शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते, भले अपने विरोधियों का ही जिक्र क्यों न कर रहे हों। उनका कहना है कि शब्दों का इस्तेमाल सोच-समझकर करते हैं और दूसरे लोग ऐसा करें, तो बेहतर है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार से निराश होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसा कुछ नहीं होने वाला, जहां कांग्रेस और एनसीपी का गठबंधन सरकार चला रहा है।
लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे पवार
केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके बजाय वह राज्यसभा के जरिये संसद में आ सकते हैं। मुंबई में पार्टी कार्यकर्ताओं से शरद पवार ने कहा, ‘ मैंने अब लोकसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। इससे मुझे पार्टी का काम करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा। मुझे राज्यसभा के जरिये संसद पहुंचने में कोई हिचक नहीं है।’
महाराष्ट्र के इस 73 वर्षीय दिग्गज नेता ने हाल के विधानसभा चुनावों के नतीजों पर एनसीपी और उसकी सहयोगी कांग्रेस को सोचने की नसीहत दी। उन्होंने कहा नतीजों पर विचार होना चाहिए।
हालांकि कांग्रेस और सहयोगी पार्टियों को हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है। लेकिन एक बात साफ है कि लोग निर्णय लेने वाले नेताओं को पसंद करते हैं। लोग उन्हें अपना समर्थन देते हैं जो फैसले लेते हैं।
चुनावी हार से पवार को फर्क नहीं
शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार चला रही कांग्रेस-एनसीपी गठजोड़ को विधानसभा चुनाव के नतीजों से ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस 1977 में किस बुरी तरह से हारी थी। लेकिन इंदिरा गांधी ने दो साल के भीतर ही कांग्रेस को फिर खड़ा कर दिया और सत्ता हासिल कर ली।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें राज्य में पार्टी की चिंता करने की जरूरत नहीं है। देश भर में जो हो रहा है जरूरी नहीं कि उसका असर महाराष्ट्र में भी दिखे। एनसीपी ने धुले, नांदरबार, अकोला और वाशिम जिला परिषद के चुनावों में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। यहां चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद चुनाव हुए थे।
लिहाजा एनसीपी को जनता के पास पूरे विश्वास से जाना चाहिए। अगर सहयोगी पार्टी कांग्रेस को हार मिली है तो इसकी कई वजहें हैं। पवार 1999 में सोनिया गांधी के विदेशी मूल को मुद्दा बना कर कांग्रेस से अलग हो गए थे। लेकिन अब पिछले 14 साल से भी ज्यादा समय से वह महाराष्ट्र सरकार में साझेदार हैं।
शरद पवार भले ही लोकसभा चुनाव न लड़ें लेकिन एनसीपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को इसके लिए तैयार रहना होगा। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजीत पवार ने पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में कहा कि राज्य के कुछ सीनियर नेताओं और मंत्रियों को लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए कहा जा सकता है ताकि संसद में इसकी सीटें बढ़ाई जा सकें।
उन्होंने कहा, ‘पवार साहब जिसे भी चुनाव लड़ने को कहेंगे, उन्हें लड़ना पड़ेगा। कुछ लोग राज्य में 15 साल से मंत्री हैं। उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने को कहा जा सकता है।’ कुछ अन्य एनसीपी नेताओं का कहना था कि कांग्रेस के साथ पार्टी को सीटों के बंटवारे पर जल्द से जल्द समझौता कर लेना चाहिए।