शैलेंद्र अग्रवाल जालसाजी केस में दाखिल चार्जशीट जांच में किए गए खेल की पूरी कहानी बयां कर रही है। एक तो पुलिस ने जालसाज को राहत देने के लिए दो संगीन धाराएं हटा लीं।
दूसरा शक के घेरे में आए अफसरों को बचाने के लिए एसएमएस की डिटेल कोर्ट से छुपा ली गई जबकि इन्हें सीबीआई की टेक्निकल विंग से डिकोड कराया गया था। अगर यह ब्योरा कोर्ट के सामने पहुंच जाता तो प्रमोशन-पोस्टिंग की बोली लगाने वाले अफसरों का बचना मुश्किल था।
पांच मई से जेल में बंद शैलेंद्र के घर से बरामद तीन मोबाइल और चार हार्ड डिस्क की जांच पहले साइबर सेल से कराई गई थी और फिर सीबीआई की टेक्निकल विंग से। एसएमएस डिकोड होने से ही दरोगाओं की ट्रांसफर-पोस्टिंग की बोली लगाए जाने का खुलासा हुआ था।