मार्केट में गारमेंट्स स्टोर के आगे लॉन्जरी और छोटे कपड़ों में महिलाओं के पुतलों या डमीज को प्रदर्शित करना क्या अश्लीलता फैलाने जैसा काम है? बांबे म्यूनिसिपल कॉरपोरशन (बीएमसी) कुछ ऐसा ही सोचती है।
मुंबई मिरर में छपी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह हुई मीटिंग में बीएमसी ने एक प्रस्ताव को स्वीकृति दी है जिसमें मुंबई में महिलाओं के सेमी न्यूड पुतलों को सार्वजनिक जगहों पर लगाने पर पाबंदी की बात कही गई है।
बीएमसी का तर्क है कि लोग इन डमीज को सेक्स ट्वाय की तरह देखते हैं और मार्केट से गुजरती महिलाएं इन्हें देखकर शर्मसार होती हैं।
हालांकि बीएमसी ने प्रस्ताव में ऐसे डमीज को शॉप के अंदर लगाने की अनुमति दी है लेकिन इसे सार्वजनिक रूप से दिखाने पर प्रतिबंध लगाया है।
म्यूनिसिपल कमिश्नर की स्वीकृति मिलने के बाद यह नया नियम मुंबई में लागू हो जाएगा।
इस बारे में जानकारी देते हुए मेयर सुनील प्रभु ने बताया, 'हमने यह प्रस्ताव पास करके म्यूनिसिपल कमिश्नर के पास भेज दिया है। उनका जवाब आते ही हम नए गाइडलाइंस बनाएंगे।'
मेयर ने यह भी कहा कि महिलाओं पर बढ़ती यौन हिंसा को देखते हुए इन डमीज को बैन करना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा, 'अंडरगार्मेंट्स को जिस तरह इन डमीज के जरिए शॉप के मालिक बाहर प्रदर्शित कर बेचते हैं, वह बहुत अपमानजनक है।'
पिछले महीने इस मुद्दे को बीएमसी में घाटकोपर से बीजेपी की कॉरपोरेटर रितु तवाडे ने उठाया था। उनका कहना था, 'इन डमीज को इस तरह से सेमी न्यूड प्रदर्शित करने की जरूरत क्या है? आखिर ये गारमेंट्स महिलाएं ही खरीदेंगी जो इन डमीज को देखकर शर्मसार और अपमानित महसूस करती हैं। हां, पुरूष जरूर इसे सेक्स ट्वायज समझते होंगे।' तवाडे ने तर्क दिया था कि ये सेमी न्यूड डमीज महिलाओं पर यौन हिंसा के लिए लोगों को उकसाती हैं।
इस बारे में शिव सेना की दहीसार की कॉरपोरेटर शीतल महात्रे का कहना था कि यह महिलाओं के आत्मसम्मान का जुड़ा सवाल है क्योंकि कोई महिला इन डमीज को देखकर कपड़े नहीं खरीदती।