सेतुसमुद्रम परियोजना के निर्माण पर अड़ी केंद्र सरकार को सर्वोच्च अदालत में जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी जवाब देंगे।
जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार के हलफनामे पर प्रति उत्तर दाखिल करने के लिए स्वामी को तीन हफ्ते का समय दिया है। इस अवधि में तमिलनाडु सरकार को भी हलफनामा दाखिल करना है।
स्वामी की ओर से रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की गई थी। सरकार ने 22 फरवरी को दाखिल हलफनामे में कहा था कि 829 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद इस परियोजना को बंद नहीं किया जा सकता।
अपनी परियोजना को आर्थिक और पर्यावरण के लिहाज से सही ठहराते हुए केंद्र ने वैकल्पिक मार्ग के लिए गठित पर्यावरणविद् आरके पचौरी समिति की सिफारिशों को नकार दिया है।
यह समिति इस नतीजे पर पहुंची यह आर्थिक और पर्यावरण के लिहाज से व्यवहारिक नहीं है। समिति का मानना है कि तेल रिसाव से पर्यावरण के लिए खतरा पैदा होगा।
मगर जहाजरानी मंत्रालय ने हलफनामे में स्पष्ट कर दिया कि सरकार ने बहुत शीर्ष स्तर के शोध के आधार पर परियोजना को हरी झंडी दी है।
परियोजना समुद्र मार्ग निर्देशन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार 30 जून, 2012 तक परियोजना पर 829 करोड़ 32 लाख रुपये खर्च कर चुकी है। इस कारण पचौरी समिति की सिफारिशों को मानने का सवाल नहीं उठता।