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मतपेटियों की सुरक्षा से पीएसी हटी, मचा हड़कंप

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पश्चिम उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के बाद स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था में अचानक हुए बदलाव से प्रत्याशियों में हड़कंप मच गया है। इसके लिए पहले आरएएफ मांगी गई थी, जिसके न मिलने पर पीएसी लगाई गई थी। अब अचानक पीएसी हटाकर मतपेटियों की सुरक्षा पुलिस के हवाले कर दी गई है।
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ऐसे में मतपेटियों में सेंधमारी और उन्हें बदले जाने की चर्चाओं पर प्रत्याशी मतगणना स्थल पर पहुंचने शुरू हो गए हैं। प्रत्याशियों ने गड़बड़ी की आशंका जताई है तो भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने राज्य निर्वाचन आयुक्त से शिकायत करते हुए मतपेटियों से छेड़छाड़ की साजिश का अंदेशा जताया है।

वहीं, प्रशासन का कहना है कि त्योहारों की संवेदनशीलता के कारण ऐसा किया गया है। जनपद के नौ ब्लॉकों में क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्य का मतदान हो चुका है। मतदान के बाद सभी मतपेटियां ब्लॉक स्तरों पर बनाए गए मतगणना स्थलों पर स्ट्रांग रूम में बंद कर दी गई थीं। सुरक्षा की दृष्टि से यहां चौबीस घंटे पीएसी के साथ आरएएफ तैनात की गई थी। लेकिन, दो दिन पूर्व अचानक इस सुरक्षा बल को यहां से हटाते हुए सिविल पुलिस की तैनाती कर दी गई।
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सेंधमारी की चर्चाओं से प्रत्याशियों में मची खलबली

सुरक्षा व्यवस्था में चुपचाप हुए इस बदलाव पर प्रत्याशियों में खलबली मची है। वार्ड एक के प्रत्याशी कुलविंदर, वार्ड तीस के डॉ. मनोज अधाना, वार्ड 31 के वसीम जब्बार, वार्ड 28 के विश्वराज विशु, वार्ड दो के अनुज भाटी, वार्ड 32 के डॉ. सुशील, वार्ड 15 की डॉ. मीनाक्षी भराला और वार्ड 19 के योगेंद्र कुसैड़ी आदि ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

प्रत्याशियों का कहना है कि सिविल पुलिस सीधे सत्ता के दबाव में काम करती है। ऐसे में मतपेटियों की सुरक्षा में सिविल पुलिस की तैनाती नहीं होनी चाहिए थी। फिर राज्य निर्वाचन आयोग ने जो निर्देश दिए थे, उसे सरकार को अपने स्तर से बदलने का कोई हक नहीं था।

प्रत्याशियों ने इसके पीछे किसी बड़ी गड़बड़ी की आशंका जताई है। पीएसी हटने और सिविल पुलिस तैनात होने की सूचना पर मतगणना केंद्रों पर प्रत्याशियों ने पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लिया। वहीं, कुछ प्रत्याशियों ने समर्थकों की ड्यूटी भी निगरानी के लिए लगा दी है।
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मतपेटियां बदलने की फैली अफवाह

कृषक इंटर कॉलेज में मतपेटियों की सुरक्षा में लगाई गई पीएसी को हटा लिया गया। इस बीच अफवाह फैल गई कि स्कूल में बने स्ट्रांग रूम से मतपेटियां बदली जा रही हैं। प्रत्याशियों में हड़कंप मच गया।

प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और मतपेटियों की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों से जानकारी ली। पीएसी हटाये जाने के बाद मतपेटियों की सुरक्षा एक दारोगा और चार सिपाहियों को दी गई है। एसडीएम मवाना रितु पूनिया का कहना है कि त्योहारों की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे प्रदेश में चुनाव ड्यूटी में लगी पीएसी को हटाया गया है।

'यह राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकार में हस्तक्षेप है। सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव निर्वाचन आयोग के आदेश पर ही हो सकता है। लेकिन शासन के दबाव में ऐसा किया है। और निश्चित रुप से यह मतपेटियों से छेड़छाड़ की साजिश है। मैने इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयुक्त से शिकायत करते हुए पीएसी और आरएएफ तैनाती की मांग की है।'
- डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, प्रदेशाध्यक्ष भाजपा

'प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव में खेल कर रही है। इसी कारण मतपेटियों की सुरक्षा से पीएसी और आरएएफ हटायी गयी है। निश्चित रुप से इसके पीछे सरकार की गलत मंशा है। नहीं तो त्योहारों के मद्देनजर सुरक्षा के लिए बाहर से अतिरिक्त फोर्स मंगाया जा सकता था।'
- लखीराम नागर, पूर्व मंत्री और बसपा नेता

'मतपेटियों की पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था की गई है। त्योहारों पर संवेदनशीलता को देखते हुए पीएसी और आरएएफ को अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया है। सिविल पुलिस की तैनाती में भी मतपेटियों के साथ कोई गड़बड़ी नहीं होगी।'
- पंकज यादव, जिलाधिकारी
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