लोकसभा चुनावों में सभी दलों की नजर मुस्लिम वोटों पर लगी हुई है। जैसे-जैसे चुनावों की गर्मी बढ़ रही है, मुस्लिम वोटों के दावेदार बढ़ रहे हैं।
समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम को लुभाने के लिए नौकरियों में आरक्षण का वादा किया है। आम आदमी पार्टी मुखिया अरविंद केजरीवाल भी मुस्लिम वोटों के लिए टोपी पहनने जैसे पारंपरिक नुस्खे अपना चुके हैं। अब मुस्लिम वोटों की पुरानी रहनुमा रही कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिमों को लुभाने के लिए सेक्यूलरिज्म का कार्ड खेला है।
कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी मंगलवार को जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी से मुलाकात की और कहा कि मुश्किलों और हिचक के बाद भी वे राजनीति में आई हैं तो केवल सेक्यूलरिज्म को बचाने के लिए।
मुस्लिम प्रतिनिधियों से सोनिया ने की मुलाकात
जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी के नेतृत्व में मुस्लिमों के एक प्रतिनिधि समूह ने मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से मुलाकात की। इस अवसर पर कांग्रेस नेता अहमद पटेल भी मौजूद थे।
राजनीतिक हलकों में मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। इमाम बुखारी के साथ सोनिया गांधी की ये पहली मुलाकात थी। जामा मस्जिद की इमाम के साथ कांग्रेस अध्यक्ष की भी पिछले 30 सालों में ये पहली मुलाकात है।
बुखारी ने बताया कि सोनिया ने इस अवसर पर कहा कि उनके राजनीति में आने की एक मकसद देश में सेक्यूलरिज्म को बचाना और बढ़ाना भी रहा है। उन्होंने कहा कि सोनिया चुनावों में सेक्यूलरिज्म वोटों के बंटवारे को रोकने के लिए संयुक्त रूप से प्रयास करने की अपील की।
इमाम बुखारी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की मदद की थी। ऐसे में ये मुलाकात अहम मानी जा रही है।
इंदिरा गांधी के रास्ते पर चलीं सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने जामा मस्जिद के इमाम से पहली बार मुलाकात की है और चुनावों में समर्थन मांगा है। लेकिन उनकी सास इंदिरा गांधी इस रणनीति पर पहले भी काम करती रही हैं।
80 के दशक में इंदिरा गांधी जामा मस्जिद के तात्कालिक इमाम सैयद अब्दुल्ला बुखारी से चुनावों में समर्थन मांगा करती थी। सैयद अब्दुल्ला बुखारी कांग्रेस के बड़े समर्थको में से एक थे। जामा मस्जिद के मौजूदा इमाम उन्हीं के बेटे हैं।
ऐसे में माना जा रहा है कि बुखारी यदि कांग्रेस के समर्थन की अपील करते हैं, तो आगामी चुनावों में पार्टी को फायदा हो सकता है। इमाम बुखारी इस संबंध में एक अपील जारी कर सकते हैं।
सोनिया गांधी ने माना, मुश्किल में मुस्लिम
प्रतिनिधि मंडल में मौजूद जामा मस्जिद फाउंडेशन के सचिव राहत महमूद चौधरी के मुताबिक, सोनिया गांधी ने मुलाकात में कहा कि अल्पसंख्यकों ने हमेशा कांग्रेस पर भरोसा किया है।
सोनिया ने कहा कि, सरकार की योजनाओं को लेकर मुस्लिमों को कई मुश्किलें पेश आ रही हैं। लेकिन हम ऐसे तरीकों पर काम कर रहे हैं, जिससे इन मुश्किलों को कम किया जा सके।
गौरतलब है 2005 में यूपीए सरकार ने मुस्लिम की आर्थिक और सामाजिक अध्ययन के लिए सच्चर कमेटी का गठन किया था। कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, चार फीसदी से भी कम मुस्लिमों की शिक्षा स्नातक तक थी। बेरोजगारी का स्तर भी ये देश के अन्य समुदायों से अधिक था।
सोनिया-इमाम की मुलाकात का असर होगा?
सोनिया और इमाम की मुलाकात पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने देश में हमेशा बंटवारे की राजनीति की है। ये देश की सबसे सांप्रदायिक पार्टी है।
भाजपा प्रवक्ता एमजे अकबर ने कहा कि वे दिन लद गए, जब मुस्लिम ऐसी अपीलों पर वोट दिया करते थे। अब वे जागरूक हो चुके हैं। वहीं, सोनिया इमाम की मुलाकात का चुनावों में फायदा होगा कि नहीं इस पर विश्लेषकों की अलग-अलग राय है।
चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम अब एक समूह में वोट नहीं देते, बल्कि सीट-दर-सीट अपनी रणनीति तय करते हैं। ऐसे में 80 की दशक की इंदिरा गांधी की रणनीति आज कामयाब हो पाएगी, ये कहना मुश्किल हैं।