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वैज्ञानिक जगदीश चंद्र को भेजा एक लाख का बिल!

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झारखंड सरकार ने मशहूर वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बोस को डिफॉल्टर घोषित कर दिया है।झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने इस मशहूर वैज्ञानिक के नाम एक लाख रुपए का बिजली बिल भेजा।
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इसे चुकाने की अंतिम तारीख 27 जनवरी थी। जीव विज्ञान के इस मशहूर वैज्ञानिक का निधन 23 नवंबर 1937 को ही हो गया था। बिजली बिल साल 1970 से 2003 तक का है।

इसकी पुष्टि करते हुए जेबीवीएनएल के एग्जक्यूटिव इंजीनियर पीके झा ने कहा, "यह बकाया गिरिडीह स्थित सर जगदीश चंद्र बोस मेमोरियल साइंस सेंटर पर है। 1970 में उस बिल्डिंग में बिजली का कनेक्शन दिया गया था। उस समय उपभोक्ता की जगह लोगों ने जेसी बोस नाम लिखवा दिया। उन्हीं के नाम पर बिल जाता रहा।"
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बोस की मौत के 33 साल बाद कनेक्शन कैसे दिया ?

झा ने इसके आगे कहा, "साइंस सेंटर बनने के बाद उसके निदेशक ने भी कभी नाम बदलवाने की कोशिश नहीं की। इस मामले में 12 जनवरी को उन्हें 1,01,816।12 रुपए बकाया का बिल भेजा गया। सर बोस या उनके परिवार की यह निजी देनदारी नहीं है।"

साइंस सेंटर के केयर टेकर बिनोद मंडल ने बताया, "सर जेसी बोस के नाम पर ही पहले भी बिल आते थे। इसका भुगतान नहीं करने के कारण 2003 में यहां की बिजली काट दी गई थी।

सर्व शिक्षा अभियान का दफ्तर खुलने पर फिर बिजली कनेक्शन दे दिया गया।"पर स्थानीय पत्रकार और वकील प्रवीण कुमार मिश्र सवाल उठाते हैं कि डॉक्टर बोस की मौत के 33 साल बाद उनके नाम पर कनेक्शन कैसे दिया गया?
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ऐसे आया एक लाख का बिल

मिश्र ने बताया कि पहले इस बिल्डिंग का नाम 'शांति भवन' था। सर जेसी बोस ने यहीं पर अंतिम सांस ली थी। यहां उनकी याद में सन 1997 में डिस्ट्रिक्ट साइंस सेंटर खोला गया। तब यह अविभाजित बिहार का हिस्सा था।

तब तत्कालीन राज्यपाल एआर किदवई ने इसका उदघाटन किया था।जेसी बोस मेमोरियल डिस्ट्रिक्ट साइंस सेंटर के पूर्व डेमॉन्सट्रेटर उदय शंकर उपाध्याय ने कहा, पहले बिहार काउंसिल आफ साइंस एंड टेक्नोलाजी इसकी देखरेख करता था। सभी बकाये का भुगतान भी काउंसिल की ही जिम्मेदारी थी।

लेकिन, बिजली बिल का भुगतान नहीं किया गया।उनके मुताबिक़, साल 2000 में अलग झारखंड राज्य बनने के बाद सरकार ने बकाया का भुगतान करने से इंकार कर दिया। इस वजह से बकाया बढ़ कर एक लाख से भी अधिक हो गया।
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