हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों द्वारा छात्रों से तीन माह या उससे ज्यादा की फीस एक साथ वसूलने के फैसले को गैरकानूनी ठहराया है। अदालत ने कहा है कि स्कूल प्रति माह ही फीस ले सकते हैं। कोर्ट के इस निर्णय से राजधानी के लोगों को काफी राहत मिली है।
न्यायमूर्ति बाल्मिकी जे मेहता ने शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर को भी गलत ठहराया, जिसमें निजी स्कूलों को तीन माह की फीस एक साथ वसूलने की बात कही गई है। अदालत ने कहा कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट 1973 के तहत स्कूलों के लिए नियम तय किए गए हैं।
इसमें स्पष्ट प्रावधान है कि स्कूल प्रति माह एक से 10 तारीख के बीच फीस ले सकते हैं। माह की 10 तारीख तक फीस अदा न करने पर प्रतिदिन पांच पैसे जुर्माने का भी प्रावधान है। कोर्ट ने यह फैसला कैलाश कॉलोनी स्थित समर फील्ड स्कूल के खिलाफ दायर याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।
अदालत ने स्कूल के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि शिक्षा निदेशालय के सर्कुलर के तहत वे तीन माह की फीस एक साथ ले सकते हैं। अदालत ने कहा कि शिक्षा निदेशालय को नियमों का उल्लंघन कर तीन माह की फीस एक साथ वसूलने के लिए सर्कुलर जारी करने का अधिकार नहीं है।
राहुल चड्ढा समेत 10 बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल के फैसले को वर्ष 2010 में चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि अधिकांश अभिभावकों को प्रतिमाह वेतन मिलता है। स्कूल मनमाने तरीके से फीस में बढ़ोतरी कर रहा है।
अब छठे वेतन आयोग की आड़ में फीस बढ़ा दी गई है। इससे अभिभावकों पर वित्तीय भार बढ़ा है और वे तीन माह की फीस एक साथ देने में असमर्थ हैं। जबकि स्कूल प्रशासन प्रति माह फीस लेने को तैयार नहीं।