महिलाओं द्वारा यौन उत्पीड़न के बढ़ते आरोपों के बाद केंद्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि हम लोग अब किसी भी औरत या लड़की को सेक्रेटरी बनाने से डरने लगे हैं।
जम्मू और कश्मीर के पूर्व सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि अब तो महिलाओं से बात करते हुए डर लगने लगा है कि कहीं वह कोई आरोप ना लगा दे। उन्होंने कहा कि यह जो कुछ भी हो रहा है, वह गलत है। इसमें महिलाओं की कोई गलती नहीं है। इसके लिए हमारा समाज जिम्मेदार है।
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फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि यौन आरोपों से घिरे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके गांगुली पर कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के जज थे। अगर वो देश के लोगों को नहीं समझ पा रहे हैं तो क्या कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर वे पश्चिम बंगाल के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो उनसे जबरदस्ती ऐसा करवाया जाएगा।
इधर, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और फारुख अब्दुल्ला के बेटे उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पापा अपने बयान पर माफी मांगेगे। और उसके तुरंत बाद सीनियर अब्दुल्ला ने अपने बयान पर माफी मांग ली है।
वहीं भाजपा ने फारुख अब्दुल्ला के बयान की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इस मामले में उनसे माफी मांगने को कहा था।
गांगुली पर क्या है आरोप?
लॉ इंटर्न ने ब्लॉग पर आरोप लगाए थे कि सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जस्टिस ने पिछले साल दिसंबर में एक होटल के कमरे में उसके साथ यौन दुर्व्यवहार किया। मीडिया में 12 नवंबर को इस मामले के खुलासे के बाद चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट के जजों जस्टिस आरएम लोढ़ा, एचएल दत्तू और रंजना प्रकाश देसाई की समिति मामले की जांच के लिए गठित की थी। समिति ने 28 नवंबर को अपनी रिपोर्ट चीफ जस्टिस को सौंप दी थी।