पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने वीके सिंह को नोटिस जारी करके पूछा कि आप पर अवमानना का केस क्यों नहीं चलाया जाए।
कोर्ट ने वीके सिंह से 23 अक्टूबर तक जवाब देने के लिए कहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन एक्सप्रेस को भी नोटिस भेजा है।
सिंह ने अपनी उम्र के विवाद से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एक बयान दिया था, जिस पर न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया है।
केंद्र के खिलाफ सिंह की याचिका खारिज करने वाली न्यायमूर्ति आरएम लोढा और न्यायमूर्ति एचएल गोखले की ने उन खबरों का संज्ञान लिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर रेप पीड़िता की उम्र पर फैसला मेट्रिक सर्टिफिकेट के हिसाब से हो सकता है, तो उनके मामले में ऐसा क्यों नहीं हुआ।
उन्होंने कहा था, "अगर अदालत रेप पीड़िता की उम्र पर फैसला करते वक्त मेट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट पर गौर कर सकती है, तो मेरी उम्र पर निर्णय लेते समय वह मेरा सर्टिफिकेट चेक करने और दोबारा चेक करने के बावजूद ऐसा क्यों नहीं कर सकी?"
सिंह अपने उम्र विवाद से जुड़ी कानूनी लड़ाई अदालत में हार चुके हैं। अदालत ने कहा था कि सर्विस से जुड़े मामले में उनकी जन्मतिथि पर सरकार का फैसला लागू होगा। इसके बाद उन्हें अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी थी।