टाटा-राडिया फोन टैपिंग मामले में आयकर विभाग (आईटी) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कारपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया की टेलीफोन पर हुई बातचीत का लिखित ब्यौरा (ट्रांसक्रिप्ट) दाखिल कर दिया।
विभाग की ओर से 38 भागों (वॉल्यूम) में बातचीत का संपूर्ण ब्यौरा सौंपा गया। सर्वोच्च अदालत ने पिछले साल 6 अगस्त को राष्ट्रीय सुरक्षा पर चिंता जताते हुए समुचित जांच कर विभाग को 5800 टेपों का ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया था।
जस्टिस जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष आयकर विभाग की ओर से राडिया की टेलीफोन पर हुई बातचीत के लिखित ब्यौरे से संबंधित दस्तावेज पेश किए गए। पीठ ने कहा कि दस्तावेजों पर गौर करने के बाद ही इस मामले में आगे कोई कदम बढ़ाया जाएगा।
ब्यौरे की जांच कर अदालत यह तय करेगी कि इस मामले में आगे कोई कार्यवाही की जा सकती है या नहीं। याद रहे कि टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा की ओर से टेलीफोन की बातचीत रिकॉर्ड किए जाने के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की गई थी। उन्होंने राडिया से हुई उनकी बातचीत को रिकॉर्ड किए जाने को निजता के अधिकार का उल्लंघन करार देते हुए याचिका दायर की थी।
अगस्त में हुई सुनवाई में पीठ ने इस मामले में कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा था कि यह बहुत ही गंभीर मामला है और आईटी विभाग ने रिकॉर्ड की गई बातचीत का लिखित ब्यौरा नहीं तैयार किया। इनमें से कुछ संदेहास्पद आर्थिक लेन-देन से संबंधित हो सकती हैं जिनका असर राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा।
पीठ ने समक्ष पिछली सुनवाई में सरकार की ओर से जांच के सारांश उपलब्ध कराए गए थे और इसी वजह से पीठ ने कड़ी नाराजगी जताई थी। सर्वोच्च अदालत ने आयकर विभाग (जांच) के महानिदेशक को निर्देश दिया था कि अधिकारियों की एक टीम गठित कर बातचीत का लिखित ब्यौरा तैयार करें और इस काम को दो माह में पूरा कर सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश करें।