अखबारों में एक बड़ी खबर- 'मुजफ्फर नगर दंगों के लिए यूपी सरकार जिम्मेदार- सुप्रीम कोर्ट'। अगर चुनावी सरगर्मियां जोरों पर न होतीं तो अब तक कोर्ट के इस फैसले से यूपी सरकार बुरी तरह घिर चुकी होती।
देखा जाए तो यह एक बड़ी खबर थी। मुस्लिम वोट बैंक के बल पर सत्ता में आई समाजवादी पार्टी के लिए ऐन चुनावों से पहले एक बड़ा झटका। दूसरी बड़ी बात, गुजरात दंगों के लिए नरेंद्र मोदी को पानी पी-पी कर कोसने वाले मुलायम के हाथ से एक मुद्दा निकल गया।
सेक्यूलरिज्म की पैरोकारी में आगे रहनी वाली सपा ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चुप्पी साध ली। हालांकि ये तय है कि इस फैसले का दूरगामी असर होगा। पहले से छिटका मुस्लिम वर्ग मुलायम से और दूरी बना लेगा।
क्या कहता है कोर्ट का फैसला
मुजफ्फरनगर दंगों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट का कहना है कि मुजफ्फरनगर दंगों को रोक पाने और पुनर्वास की व्यवस्था में उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह नाकाम रही।
हालांकि कोर्ट ने कहा है कि मामले को जांच के लिए एनआईटी या सीबीआई को सौंपने की जरूरत नहीं है।
अखिलेश सरकार देगी इस्तीफा?
सवाल उठता है कि क्या सुप्रीम कोर्ट की लताड़ के बाद नैतिक तौर पर अखिलेश सरकार को इस्तीफा देना चाहिए। अगर सुप्रीम कोर्ट किसी एजेंसी को मामले की जांच सौंपता तो अखिलेश के पास जांच पूरी होने तक सत्ता में बने रहने का बहाना होता।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि दंगों के लिए यूपी सरकार जिम्मेदार है। अब चुनाव से पहले दंगों के दाग न तो सपा छिपा पाएगी और न ही मिटा पाएगी।
क्या कहना है सपा का?
कोर्ट के फैसले पर सपा नेता शिवपाल यादव ने यह कहकर मीडिया को वापस भेज दिया कि कोर्ट के फैसले को पूरी तरह पढने के बाद ही टिप्पणी की जाएगी। लेकिन विरोधी पार्टियों को क्या हो गया है।
खासकर भाजपा को इस मसले पर त्वरित प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। लेकिन चुनाव प्रचार और अपने ही घर की लड़ाई में बिजी भाजपा को इस मसले पर ध्यान देने की शायद फुरसत नहीं है।
अब कैसे कोसेंगे मोदी को?
अभी कुछ समय पहले तक मुलायम गुजरात दंगों के लिए नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार बताते थे। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट की क्लीन चिट के बाद भी मुलायम मोदी को दंगों का मसीहा कहा करते थे।
लेकिन मुजफ्फरनगर दंगों ने हालात पलट दिए हैं। एक तरफ मोदी क्लीन चिट पा चुके हैं और मुलायम दंगों के दाग लगा चुके हैं।