आंध्र प्रदेश में ठेकेदारों द्वारा ओडीशा के प्रवासी मजदूरों के हाथ काटे जाने की दर्दनाक घटना से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने देश में ऐसे लोगों का शोषण और उन पर अत्याचार रोकने के लिए एक नीति तैयार करने पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में इस बारे में मीडिया में आई खबरों का जनवरी में स्वत: ही संज्ञान लेते हुए ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया था।
अदालत ने कहा था कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां ऐसी घटनाओं के प्रति आंख नहीं मूंद सकती हैं। अदालत ने फिलहाल दो राज्यों तक ही अपनी कार्यवाही सीमित रखी है।
न्यायालय ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के बारे में एक नीति होनी चाहिए। ये श्रमिक अनधिकृत ठेकेदारों के चंगुल में नहीं पड़ने चाहिए।