सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश झा की फिल्म चक्र व्यूह के गाने टाटा, बिरला और बाटा को हिदायत (डिस्कलेमर) के साथ प्रदर्शन की अनुमति दे दी है। रेडियो तथा ऑडियो प्रसारणों में भी हिदायत को प्रसारित किया जाना जरूरी होगा। वीडियो के अलावा लिखित हिदायत को भी फिल्म के गाने में प्रदर्शित करना होगा।
चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा कि रेडियो पर इस गाने के प्रसारण से पहले भी ऑडियो डिस्क्लेमर प्रसारित करना होगा। बाटा कंपनी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार का कहना था कि गाने के बोल आहत करने वाले हैं। इससे कंपनी की प्रतिष्ठा और साख पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गाने में कहा गया है कि कंपनी गरीब का शोषण करती है और लाभ कमाने के लिए उन्हें चूस लेती है।
वकील का कहना था कि बाटा कंपनी 46 देशों में कारोबार करती है और यह गाना दुनिया भर में उसकी छवि को नुकसान पहुंचाएगा। पीठ हालांकि वकील की दलीलों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी। बाद में अदालत ने हिदायत के साथ फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति दे दी। इस डिस्क्लेमर में यह स्पष्ट करना होगा कि इस गाने का मकसद उन व्यक्तियों का अनादर करना नहीं है, जिनमें नामों का इसमें जिक्र है।
शीर्षस्थ अदालत ने किसी भी पक्ष को आहत पहुंचाने वाले शब्दों के इस्तेमाल पर नाराजगी जताई और प्रकाश झा को आगाह किया कि भविष्य में इस बात का ध्यान रखें। इससे पहले टाटा कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर बाटा कंपनी ने शीर्षस्थ अदालत का दरवाजा खटखटाया।
प्रकाश झा की फिल्म ‘चक्र व्यूह’ 24 अक्तूबर को प्रदर्शित होगी। इसमें आसमान छू रही महंगाई और समाज में संपत्ति के असंतुलित वितरण को लेकर एक गाना है जिसमें बाटा सहित कई प्रमुख उद्योगपतियों के नाम हैं। सर्वोच्च अदालत को यह भी बताया गया कि बिरला औद्योगिक घराने ने भी प्रकाश झा के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने हिदायत के साथ फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति दे दी है।