यमुना को बंधन मुक्त कराने के लिए पदयात्रा कर दिल्ली पहुंचे यमुना मुक्ति आंदोलनकारियों को दिल्ली पुलिस ने आली गांव में अघोषित बंधक बना लिया है।
दिल्ली पुलिस आली गांव के अस्थाई पड़ाव से आंदोलनकारियों के जत्थे को जाने की अनुमति नहीं दे रही है। जबकि आंदोलनकारी संसद मार्च करने को लेकर अडिग हैं।
पुलिस केवल दो-तीन सौ आंदोलनकारियों को मार्च के लिए भेजने के लिए तैयार है, लेकिन आंदोलनकारियों को यह स्वीकार नहीं है।
आंदोलनकारियों को केंद्र सरकार के साथ चल रही वार्ता का नतीजा निकलने का इंतजार है। उसके बाद ही यमुना रक्षक दल और भारतीय किसान यूनियन भानू की ओर से किसी प्रकार का कोई निर्णय लिया जाएगा।
हालांकि सरकार से वार्ता विफल रहने की स्थिति में आलीगांव मैदान में ही यमुना मुक्ति आंदोनकारियों ने आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान किया है।
फिलहाल आंदोलनकारियों ने सरकार द्वारा मांगे गए समय का किसी प्रकार से विरोध करना शुरू नहीं किया है। यमुना रक्षक दल का आरोप है कि पहले यमुना मुक्ति आंदोलन के दिल्ली प्रवेश के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई शर्ते थोपकर परेशानी बढ़ाई।
अब आलीगांव स्थित अस्थाई पड़ाव से हजारों आंदोलनकारियों को संसद मार्च करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। हजारों की तादाद में पहुंचे यमुना समर्थक, साधु-संत और किसानों ने सरकार और दिल्ली पुलिस को चेताया कि संसद मार्च की अनुमति नहीं देने पर आलीगांव में ही आमरण अनशन शुरू हो जाएगा।
हजारों लोग एक साथ यहां अनशन पर बैठ जाऐंगे। यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास बरसाना ने आंदोलनकारियों को अघोषित बंधक बनाये जाने पर केंद्र सरकार की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों की इस तरह से पुलिस घेराबंदी करना कतई उचित नहीं है।
यमुना के लिए जहां नाला गिर रहा है, वहां इनकी तैनाती करनी चाहिए। भारतीय किसान यूनियन भानू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने केंद्र सरकार को चेताया कि यमुना समर्थकों की धैर्य की परीक्षा केंद्र सरकार न लें, वर्ना आगामी चुनाव में इसकी भारी कीमत सरकार को चुकानी पड़ेगी। समाचार लिखे जाने तक सरकार के साथ चल रही वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकल सका था।
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