इन दिनों हिंदुस्तान में बसने वालों की छाती गर्व से फूली है, जिसकी वजह सत्या नडेला हैं। दुनिया की दिग्गज आईटी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट की सबसे ऊंची कुर्सी तक पहुंचकर सत्या ने भारतीयों को उछलने का बहाना दे दिया।
भारतीय-अमेरिकी मूल के इंजीनियर सत्या नडेला टेक्नोलॉजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट की उस कुर्सी पर बैठेंगे, जिस पर कभी बिल गेट्स बैठते थे। कंपनी के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन बिल गेट्स भी सत्या के दीवाने हो गए हैं। उन्होंने कहा, "माइक्रोसॉफ्ट को चलाने के लिए उनसे बेहतर कोई नहीं हो सकता।"
माइक्रोसॉफ्ट के नेतृत्व परिवर्तन के इस चक्र में पूर्व सीइओ स्टीव बामर की जगह नडेला ने ली तो, कंपनी के चेयरमैन के तौर पर बिल गेट्स की जगह जॉन थॉम्पसन ले रहे हैं। लेकिन भारतीयों को इंतजार है कि नडेला भारत का जिक्र कब करेंगे?
नडेला ने दिखाई भारतीयों से बेरुखी
सत्या ने जब माइक्रोसॉफ्ट का आसमान छुआ, तो हिंदुस्तानी भी सातवें आसमान पर जा पहुंचे। 'भारतीय इंजीनियर' के इतने ऊंचे ओहदे पर पहुंचने की घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता, इसलिए कोई कोताही नहीं बरती गई।
सभी उम्मीद कर रहे थे कि जब वह इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने के बाद कुछ बोलेंगे, तो बताएंगे कि उन्होंने कहां जन्म लिया, उस देश की संस्कृति-सभ्यता क्या रही है और उनकी कामयाबी में हिंदुस्तान का कितना बड़ा हाथ रहा है।
लेकिन सत्या हिंदुस्तानी का दिल तोड़ बैठे। अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। वह हिंदुस्तान के बारे में अब तक कुछ नहीं बोले। ऐसा नहीं कि उनके पास मौका नहीं आया था। अपने कर्मचारियों को भेजे ईमेल से इन मौकों की शुरुआत हुई, लेकिन उन्हें भारत याद नहीं आया।
क्रिकेट से नाता बताया, भारत से नहीं
इसी ईमेल में एक सेक्शन खास तौर से उनसे जुड़े सवालों का जवाब देता है। मैं कौन हूं? इसके जवाब में सत्या नडेला ने लिखा तो बहुत कुछ, लेकिन हैदराबाद, भारत या मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का कोई उल्लेख नहीं किया, जहां उन्होंने अब तक की अपनी जिंदगी का दो-तिहाई हिस्सा गुजारा है।
उनके अतीत को लेकर अगर कुछ जिक्र मिलता है, तो वह माइक्रोसॉफ्ट की ओर से जारी उनके बायोडाटा में है। इसमें उनके जन्मस्थान के आगे हैदराबाद, भारत लिखा है।
खबर यह भी आई है कि सत्या नडेला और क्रिकेट के बीच में कोई कनेक्शन है। वही क्रिकेट जिसे हिंदुस्तान में खेल की तरह नहीं, बल्कि मजहब के तौर पर लिया जाता है। सत्य क्रिकेट पसंद करते हैं और उन्होंने इसकी तुलना रूसी उपन्यासों की है।
25 साल पहले गए थे अमेरिका
मंगलवार को अहम घोषणा के कुछ देर बाद ग्राहकों और सहयोगियों के साथ उनकी बातचीत हुई, लेकिन इस चर्चा में भी हिंदुस्तान का जिक्र नहीं आया। इसे कंपनी के रेडमंड, वॉशिंगटन स्थित मुख्यालय से सीधा प्रसारित किया गया था।
नडेला करीब 25 साल पहले अमेरिका पहुंचे थे और आज वह अमेरिकी नागरिक हैं। वो इतने अमेरिकी बन गए हैं, जितने स्टीव बामर और बिल गेट्स थे, जिनकी गद्दी अब उन्होंने संभाली है।
लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत केवल उनके अतीत का हिस्सा है। जिस कंपनी की अगुवाई उन्हें सौंपी गई है, वह भारत के एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर बाजार में अगुवा है और उसके पास 31 फीसदी से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी है।
मनिपाल से हुई पढ़ाई-लिखाई
46 वर्षीय सत्या नडेला का जन्म भारत के हैदराबाद में हुआ और वहीं उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा हुई। बेगमपेट के हैदराबाद पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के बाद नडेला ने मनिपाल यूनिवर्सिटी से सूचना और प्रौद्योगिकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
अमेरिका जाने के बाद उन्होंने विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ साइंस और शिकागो यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। सत्या नडेला को ‘क्लाउड गुरु’ भी कहा जाता है।
क्यों कहा जाता है क्लाउड गुरु?
क्लाउड उस सेवा को कहते हैं जो इंटरनेट पर पूरी तरह से चलती है और उससे संबंधित सेवाएं या कंप्यूटर फाइल इंटरनेट के ज़रिए दुनिया के किसी भी कोने से देखे या प्रयोग किए जा सकते हैं।
माइक्रोसॉफ्ट में काम करते हुए सत्या ने एमएस ऑफिस को क्लाउड पर लाने में अहम भूमिका निभाई।
माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि ऑफिस 365 उसके सबसे सफल उत्पादों में से एक है। माइक्रोसॉफ्ट की अपनी क्लाउड सेवा ‘अजूर’ को भी स्थापित करने में नडेला का महत्वपूर्ण योगदान है।