करोड़ों के शारदा चिटफंड घोटाले को लेकर सीबीआई ने बुधवार को अपनी पहली चार्जशीट दायर कर दी। इसमें शारदा समूह के मालिक सुदीप्त सेन, देवयानी और तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद कुणाल घोष के नाम शामिल हैं। सीबीआई के वकीलों ने दीवाली से ठीक पहले बुधवार की शाम अदालत में चार्जशीट दायर की।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि चार्जशीट में तीनों अभियुक्तों के खिलाफ धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में आरोप तय किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तीन महीने पहले घोटाले की जांच का जिम्मा संभालने वाली सीबीआई ने 85 दिनों के भीतर पहली चार्जशीट दायर की है।
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि घोटाले के तार दूर तक फैले होने के कारण अभी जांच पूरी करने में वक्त लगेगा। अपनी जांच के दौरान सीबीआई इन तीनों के अलावा कई अन्य लोगों से भी पूछताछ कर चुकी है।
तृणमूल के निलंबित सांसद कुणाल घोष बार-बार गोपनीय बयान दर्ज कराने पर जोर देते रहे हैं, लेकिन सीबीआई का कहना है कि उनसे जितनी पूछताछ हो चुकी है उसके बाद इसकी कोई जरूरत नहीं है।
पैसा लौटाने के लिए बना सेन आयोग खत्म
शारदा चिटफंड घोटाले की जांच और ठगे गए निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए गठित न्यायमूर्ति श्यामल सेन आयोग का कार्यकाल बुधवार को खत्म हो गया। राज्य सरकार के सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई के शारदा घोटाले की जांच शुरू करने के बाद इस मामले में कई कानून जटिलताएं सामने आईं। उनको ध्यान में रखते हुए सरकार ने फिलहाल आयोग का कार्यकाल नहीं बढ़ाने का फैसला किया। आयोग ने अब तक ऐसे 4.98 लाख निवेशकों के पैसे लौटाए हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सेन आयोग की मियाद बढ़ाने संबंधी एक जनहित याचिका बुधवार को खारिज कर दी। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि अब निवेशकों का पैसा लौटाना हमारी जिम्मेदारी नहीं है। इस मामले की जांच सीबीआई और ईडी कर रही है। अब निवेशकों की जमा-पूंजी दिलाने की जिम्मेदारी उन दोनों की है।