लाहौर की कोट लखपत जेल में हमले से पहले सरबजीत सिंह के खाने में नशीला पदार्थ मिलाया गया था।
इससे खाना खाने के बाद उसका शरीर शिथिल पड़ गया और बैरक से बाहर निकलते ही उस पर जब दो पाकिस्तानी कैदियों ने हमला बोला, तो वह अपना बचाव भी नहीं कर पाया।
पंजाब के भिखीविंड निवासी सरबजीत के कत्ल की शुरुआती पड़ताल में साजिश की परतें खुलने लगी हैं और हर स्तर पर जेलकर्मियों की मिलीभगत सामने आने से प्रशासन को जवाब देते नहीं बन पा रहा है।
सरबजीत सिंह के वकील रहे लाहौर के मानवाधिकार कार्यकर्ता ओवैश शेख ने शुक्रवार को भेजे ई-मेल में दावा किया कि उन्हें जेल में तैनात एक अधिकारी ने बताया कि 26 अप्रैल की दोपहर सरबजीत के खाने में नशीला पदार्थ मिलाने का शक वहीं तैनात कर्मचारी तालिब पर है।
तालिब ही खाना देने के वक्त सरबजीत की बैरक के पास था। अफसर के मुताबिक जब सरबजीत पर मुदस्सर और आमिर ने ईंटों से हमला बोला तो न वह बचाव में भाग सका और बचाने के लिए गुहार लगा सका।
जांचकर्ताओं का मानना है कि किसी तरह का हमला होने पर कोई भी शख्स हमलावरों से मुकाबला करता है और बचाव की कोशिश करता है, लेकिन सरबजीत कुछ भी नहीं कर सका।
इसी कारण जांचकर्ताओं ने सरबजीत को खाना देने वाले तालिब को छुट्टी पर न भेजने के लिए कोट लखपत जेल के अफसरों को कह दिया है।
पाक सरकार ने फांसी खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव पर 2007 में हस्ताक्षर कर दिए थे, लेकिन अपने देश में कानून अब तक नहीं बनाया है। इसीलिए साजिश के तहत सरबजीत का कत्ल जेल में ही करवा दिया गया।
ओवैश शेख
लाहौर के वकील
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सरबजीत की आत्मिक शांति के लिए भोग शनिवार को डाला जाएगा। इसके बाद मैं खुद बताऊंगी कि सरबजीत की हत्या की साजिश में कौन-कौन शामिल था, मैं भारत सरकार से भाई की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मांग करूंगी।
दलबीर कौर
सरबजीत की बहन