एक ऐसे रोबोट का आविष्कार हुआ है जो ऑक्सीजन सेंसर की तरह काम करता है और आंखों में कम हो रहे ऑक्सीजन स्तर के बारे में चेतावनी देता है। दरअसल ऑक्सीजन की कमी से आंखों की रोशनी जा सकती है।
इस रोबोट का आविष्कार किया है जर्मनी के ज्यूरिख शहर में रोबोटिक के एक प्रोफेसर 'ब्रैडली नेल्सन' ने। प्रोफेसर का कहना है कि इस रोबोट के इस्तेमाल से अंधेपन से बचा जा सकता है।
इस रोबोट की लंबाई एक मिली मीटर है और यह एक मिली मीटर से एक तिहाई कम चौड़ा है।
आंखों में डाले जाने पर यह रोबोट आंखों में मौजूद तरल पदार्थ से मिल जाता है और ऑक्सीजन सेंसर की तरह काम करता है जो आंखों में कम हो रहे ऑक्सीजन स्तर के बारे में चेतावनी देता है। दरअसल ऑक्सीजन की कमी से आंखों की रोशनी जा सकती है।
इससे पहले भी शोधकर्ताओं ने इस क्षेत्र में कई सफलताएं प्राप्त की है। इससे पहले एक ऐसे रोबोट का आविष्कार किया गया था जिससे आंखों में दवा डाली जा सकती है साथ-ही साथ वह 'स्कार टिश्यू' को भी हटाने मे मदद करता है।
लेकिन यह ऑक्सीजन सेसिंग रोबोट थोड़ा अलग तरीके से काम करता है। जब स्पेशल डाई से बना यह माइक्रो रोबोट प्रकाश के खास तरंगधैर्य के सामने लाता है तब यह डाई चमकने लगती है।
अगर चमक तुरंत कम पड़ती है तो यह दर्शाती है कि आंखों में ऑक्सीजन का स्तर डाई के आसपास अधिक है और अगर यह चमक धीरे-धीरे कम होती है तो इससे पता चलता है कि आंखों में ऑक्सीजन का स्तर कम है।
इस रोबोट का परीक्षण पानी में ऑक्सीजन का स्तर पता लगाने के लिए किया जा चुका है और अब आंखो पर शोध होने की प्रक्रिया जारी है।