'अमर उजाला' के अभियान 'बेटी ही बचाएगी' की अलख अब संतों ने अपने हाथ ले ली है। उन्होंने मुहिम की सराहना करते हुए पूरे उत्साह से इसे आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है।
बृहस्पतिवार को उन्होंने बेटी के हक में शपथ ली और बेटी को बराबर मानने, बेटी को घर, परिवार और समाज में बराबरी का दर्जा देने के साथ दूसरों को भी ऐसा ही करने के लिए जागरूक करने का संकल्प व्यक्त किया।
शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा, सनातन संस्कृति ने तो हमेशा से ही नारी शक्ति का सम्मान किया है।
बेटियां सृष्टि की सूत्र हैं, उनसे ही परिवार, समाज और राष्ट्र का हित जुड़ा है, सो उनके सम्मान की रक्षा, धर्म का पालन है।
निर्मल पंचायती अखाड़े के अध्यक्ष महंत स्वामी ज्ञानदेव सिंह ने कहा, अपनी मातृशक्ति का सम्मान हमारे लिए सर्वोपरि है। समाज बेटियों केहक केलिए जागरूक होगा तो सुख-समृद्धि स्वयं ही आएगी।
निरंजनी अखाड़े के सचिव और मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि ने 'अमर उजाला' के संकल्प की सराहना की। कहा,सामाजिक सरोकारों की दिशा में यह पहल अद्भुत है।
सनातन सत्य है कि बेटियां ही सृष्टि की संचालक, सूत्रधार और संवाहक हैं। वे ही समाज को संतुलन, सम्मान और गरिमा देती हैं।
बेटियों के हक और सम्मान की रक्षा के लिए जागरूक करना सनातन संस्कृति की रक्षा का संकल्प भी है।