अभी केंद्रीय विद्यालयों से तीसरी भाषा के तौर पर जर्मन भाषा हटाने पर विवाद थमा भी नहीं था कि मोदी सरकार की केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने एक नया शिगूफा छोड़ दिया है।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने शनिवार को कहा कि पूरे भारत में संस्कृत भाषा अंग्रेजी का स्थान ले सकती है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा, अंग्रेजी भाषा की जगह पूरे भारत में लिंक भाषा के रूप में आ सकती है। इस भाषा को सभी लोग समझ सकते हैं।
यह बात उन्होंने तीन दिवसीय जल मंथन कार्यक्रम के दौरान कही। कार्यक्रम के दौरान वहां मौजूद श्रोताओं में से एक ने कहा कि मंच से बोलने वाले लोगों को हिंदी में बोलना चाहिए था जिससे यहां पर लोगों को समझ में आ सके।
इस पर उमा भारती ने कहा कि कुछ लोग यहां पर अंग्रेजी को नहीं समझ सकते हैं तो कई लोग हॉल में ऐसे भी हैं जो खुद को हिंदी में संवाद नहीं कर सकते हैं। यह समस्या तभी दूर हो सकती है जब संस्कृत को हम एक लिंक भाषा के तौर पर अपना लें। सही मायनों में संस्कृत ही भारत की राष्ट्र भाषा है। पूरे भारत के हर गांव में आप देख सकते हैं कि दो-तीन लोगों को अंग्रेजी का कितना ज्ञान है।
पूरे भारत में अंग्रेजी बोलने और समझने वाले लोगों से ज्यादा संख्या संस्कृत बोलने व समझने वालों की है।
अंग्रेजी पर निर्भर होने के बावजूद अभी तक भारत में संस्कृत भारत की सबसे प्रसिद्घ और सामान्य तौर पर बोली जाने वाली भाषा है।