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आरएसएस से समझौता करना चाहते थे संजय गांधी?

Fri, 12 Apr 2013 10:19 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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विकिलीक्स से इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी के बारे में कुछ और खुलासे किए हैं।
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विकिलीक्स के दस्तावेजों के मुताबिक, आपातकाल के दौरान संजय गांधी आरएसएस के साथ समझौता करना चाहते थे। केंद्र सरकार ने उस समय आरएसएस पर प्रतिबंध लगा रखा था।

हालांकि आरएसएस ने संजय गांधी के साथ किसी भी तरह का समझौता करने से इनकार कर दिया था।

वहीं, एक अन्य दस्तावेज में अमेरिकी दूतावास से भेजे गए संदेशों के आधार पर विकिलीक्स ने बताया है कि इंदिरा गांधी के निधन की स्थिति में संजय गांधी के नेतृत्व वाला गुट प्रधानमंत्री पद पर अपना उम्मीदवार बैठाने की तैयारी में था।
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यह गुट संजय गांधी के खास लोगों को था, इसलिए ऐसी संभावना थी की इंदिरा की मौत के बाद संजय ही प्रधानमंत्री बनते।
आपातकाल लागू होने के एक साल बाद भेजे गए इस केबल में इस बात की आशंका व्यक्त की गई थी कि इंदिरा के निधन के बाद की स्थिति में कांग्रेस में निष्क्रिय हो चुके तात्कालिक नेता फिर से सक्रिय हो सकते हैं और संजय गांधी के नेतृत्व वाले गुट को पीएम पद पर अपना उम्मीदवार बैठाने से रोक सकते हैं और किसी अन्य नेता को विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं।

इस खबर को अंग्रेजी समाचार पत्र द हिन्दू ने प्रकाशित किया है।

हालांकि अमेरिकी दूतावास ने एक अन्य केबल में इंदिरा के पद छोड़ने या निधन की किसी आशंका से इनकार किया था। संदेश में कहा गया था कि इंदिरा गांधी निरोग और स्वस्थ हैं। 58 साल की उम्र में भी उनकी सेहत अच्छी है और वह अगले चुनाव में पार्टी का नेतृत्व कर सकती हैं।

केबल में ऐसी संभावना जताई गई है कि अगले दस सालों इंदिरा गांधी यह महसूस कर सकती हैं कि संजय अब उनके जिम्मेदारियों को संभालने के लिए तैयार हैं। तब तक वह 40 साल के भी हो जाएंगे। फिर वह अपनी जगह संजय को लाने पर विचार कर सकती हैं।

एक अन्य केबल में दूतावास ने बताया है कि यदि इंदिरा गांधी का निधन हो जाता है तो कांग्रेस में फूट पड़ जाएगी और अस्थिरता उत्पन्न हो जाएगी। क्षेत्रीय नेताओं की ओर से तनाव और दवाब की स्थिति में अनिश्चितता की स्थिति पैदा होगी।
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इससे संजय गांधी के नेतृत्व वाला गुट खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों तथा दिल्ली प्रशासन में अपने से सहानुभूति रखने वालों का इस्तेमाल करके अपने में से किसी एक को प्रधानमंत्री पद का दावेदार प्रस्तुत कर सकता है।

ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति और सेना की भूमिका अहम होगी।

एक अन्य संदेश में दूतावास ने आशंका व्यक्त की थी कि यदि संजय गांधी के नेतृत्व वाला गुट अपने मंसूबों में सफल हो जाता है तो देश में तानाशाही बढे़गी।
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