प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को लोकसभा चुनाव में जनता से किए वादे अब भारी पड़ने लगे हैं। विपक्ष के साथ ही अपने सहयोगी संगठनों की ओर से भी सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप लगने लगे हैं।
पूर्ण बहुमत और कुशल नेतृत्व के बावजूद अहम मामलों पर सरकार के यू-टर्न ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। बताया जा रहा है कि वन रैंक वन पेंशन और रक्षा सौदों में बिचौलियों की रोक को लेकर भी सरकार अब पलटी मारने की तैयारी में है।
इससे पहले काले धन, न्यूनतम समर्थन मूल्य, बीमा विधेयक और बांग्लादेश के साथ भूमि समझौते पर उसका बदला रुख सामने आ चुका है।
एक वरिष्ठ मंत्री का कहना है कि विपक्ष में रहकर साहस दिखाना अलग बात है और सरकार में आकर उन पर अमल करना अलग मामला है। सरकार को वन रैंक वन पेंशन को लागू कर पाना सहज नहीं दिख रहा है। दिवाली के दिन सियाचिन में जवानों के बीच प्रधानमंत्री ने इसका ऐलान किया था।