मुलायम सिंह यादव के खिलाफ आम चुनाव में उम्मीदवार खड़ा करने के कांग्रेस के संकेतों से सपा तिलमिला गई है।
सपा ने पलटवार करते हुए अब खुद भी अमेठी और रायबरेली में प्रत्याशियों को खड़ा करने पर विचार की बात कही है। इसको लेकर संसद के मानसून सत्र से पहले दोनों पार्टियों के बीच तल्खी आ गई है।
उत्तर प्रदेश के नए प्रभारी और कांग्रेस महासचिव मधुसूदन मिस्त्री ने मुलायम सिंह के खिलाफ प्रत्याशी खड़ा करने की बात कही थी। मगर इसका असर दिल्ली में सत्ता गलियारों में देखा जा रहा है।
खाद्य सुरक्षा बिल का विरोध कर रही सपा को मनाने की कोशिश में लगे सरकार के मैनेजरों को अब नई राजनीतिक परिस्थितियों से जूझना पड़ सकता है।
मुलायम के गढ़ पर 'हमले' की तैयारी में कांग्रेस
राहुल गांधी के खिलाफ पहले भी सपा उम्मीदवार खड़ा करने की बात कहती रही है। मगर अब कांग्रेस की ओर से बात छेड़ने से मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
मुलायम सिंह यादव ने जहां दोनों सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने के मुद्दे पर संसदीय बोर्ड में कोई फैसला लेने की बात कही है। वहीं सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने भी दोनों सीटों पर पर्यवेक्षक भेजकर उम्मीदवार खड़ा करने पर विचार करने की बात कही है।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अगर इसी तरह की जुबानी जंग जारी रही तो मानसून सत्र में सपा का रुख कड़ा हो सकता है। सपा पहले ही खाद्य सुरक्षा विधेयक की मुखालफत कर चुकी है। सरकार के मैनेजर सपा मुखिया को मनाने की कोशिश में थे। मगर अब बात कुछ अटक सी रही है।
उधर, सपा महासचिव नरेश अग्रवाल ने कहा है कि मधुसूदन मिस्त्री की तरह कांग्रेस चाहे जितने भी राज मजदूर भेजे मगर उसका कोई भला नहीं होने वाला। प्रदेश में कांग्रेस का कोई जनाधार नहीं है।