कांस्य पदक लेने की जो खुशी उनकी चेहरे पर तैर गई थी वही खुशी उनके चेहरे पर वायु सेना की प्रशिक्षण अकादमी में थी जब वह लडाकू पायलट के ओवरआल में अकादमी के रनवे पर पहुंचीं।
वायु सेना के लड़ाकू जेट ट्रेनर विमान 'किरण मार्क-वन' सायना के स्वागत के लिए खड़ा था। यह वही विमान है जो अनेक जांबाज पायलटों की सवारी बन चुका था और आसमान में एयरोबेटिक टीम का साहसी सदस्य रहते हुए दुनियाभर में अपने करतबों से लोगों को दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर करता रहा था।
सायना ने हेल्मेट पहना और कॉकपिट का शीशा बंद होने पर विजयी मुद्रा में अंगूठा ऊपर उठाया और आसमान की ओर दनदनाते हुए उड़ चली। किरण विमान उन्हें डिंडिगुल और हैदराबाद के उन इलाकों को कभी बेहद नीची और कभी आसमान की ओर तीर की तरह भागते हुए दिखाता रहा, जहां सायना का बचपन बीता था।
करीब 40 मिनट की उड़ान के बाद जब सायना जमीन पर उतरीं तो उनके मन में स्वर्ण पदक जीतने जैसा उत्साह था। उतरते ही उन्होंने कहा कि ये बिल्कुल सपने जैसा था। मेरा सपना पूरा कराने के लिए मैं बैडमिंटन और वायु सेना की आभारी हूं जिन्होंने मेरा सपना पूरा कराया।
सायना ने अपनी उड़ान के अनुभवों के बारे में बताया कि जब विमान बादलों में पहुंचा तो मेरा दिल उछल कर गले में आ गया। मैंने अपने पायलट से कहा, नहींईंईईं। लेकिन अचानक एक सुखद अहसास मन में भर गया। उन्होंने बताया कि पूरी उड़ान के दौरान पायलट ने उन्हें बातों में रमाए रखा और कुछ देर के लिए विमान का नियंत्रण भी उनके हाथ में दिया।
भारतीय वायु सेना क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी को अपने लड़ाकू विमान में उड़ान भरने का न्यौता दे चुकी है लेकिन सायना ने इस मामले में बाजी मार ली। सचिन और तेंदुलकर अपनी व्यस्तताओं के कारण सुखोई में आज तक उड़ान नहीं भर पाए हैं जबकि उनके अनुरोध को वायु सेना ने करीब डेढ़ साल पहले ही मान लिया था।
किरण की उड़ान के बाद सायना नेहवाल अपने चिरपरिचित बैडमिंटन कोर्ट में पहुंचीं और वायु सेना द्वारा आयोजित प्रदर्शनी मैच में भी हिस्सा लिया।