फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हैदराबाद में हुए नुकसान की भरपाई है JNU विवाद?

विज्ञापन
विज्ञापन
भगवा परिवार जेएनयू मामले पर नरमी बरतने के मूड में नहीं है। यह विवाद असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल चुनाव में भी मुद्दे के रूप में कार्य करेगा।
विज्ञापन


विपक्ष के लिए यह मुद्दा सरकार के खिलाफ एकजुट होने के अवसर के रूप में दिख रहा है। भगवा परिवार भी इस मुद्दे को पिछले मुद्दों से ध्यान बंटाने और अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने के रूप में देख रहा है।

इसे ध्यान में रखते हुए ही भगवा परिवार ने अपनी रणनीति बनाई है। यह तय हुआ है कि मामले को संवैधानिक राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए सभी नेता आक्रामक रहेंगे।

हालांकि, संसद सत्र में विपक्षी हमले की धार कुंद करने की कवायद में सियासी दलों से बातचीत की कमान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हाथ में लेने का निर्णय लिया है। मोदी खुद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुला सकते हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन

जेएनयू विवाद पर हुई चर्चा

सूत्र बताते हैं कि रविवार को हुई कोर समूह की बैठक में मुख्य रूप से जेएनयू विवाद और संसद के बजट सत्र की रणनीति पर चर्चा हुई। पार्टी नेताओं को जेएनयू मामले पर बेहद आक्रामक रुख अपनाने को कहा गया है। इस कवायद में गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह खुद मोर्चा संभालते हुए पार्टी के इरादे जता दिए हैं।

उन्होंने पार्टी प्रवक्ताओं से कहा है कि वे जेएनयू मामले में फ्रंट फुट पर रहकर विपक्ष पर हमला बोलें। पार्टी के सियासी हमले की रणनीति मामले को संवैधानिक राष्ट्रवाद के इर्दगिर्द रखने की है। ताकि वह अपने कोर समर्थकों का मनोबल बढ़ाने के साथ विपक्ष को बैक फुट पर धकेल सके।

इसीलिए मामले में राजनाथ ने हाफिज सईद का नाम जोड़ा, तो शाह ने अफजल गुरू के जरिए शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व को घेरने की कोशिश की। कहा जा रहा है कि जेएनयू मामले पर सरकार और भाजपा के रुख को संघ परिवार का भी पूरा समर्थन प्राप्त है।

जेएनयू विवाद को भगवा परिवार दादरी कांड को लेकर देश में छिड़ी असहिष्णुता की बहस और हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमूला की आत्महत्या से हुए सियासी नुकसान की भरपाई के अवसर के रूप में देख रहा है। सरकार को भी यह इसलिए रास आ रहा है क्योंकि देश के आर्थिक हालातों से जनता का ध्यान हटाने में मदद मिलेगी। जिस तरह से शेयर बाजार धड़ाम हो रहा है। इससे सरकार की परेशानी बढ़ सकती थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें