भगवा परिवार जेएनयू मामले पर नरमी बरतने के मूड में नहीं है। यह विवाद असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल चुनाव में भी मुद्दे के रूप में कार्य करेगा।
विपक्ष के लिए यह मुद्दा सरकार के खिलाफ एकजुट होने के अवसर के रूप में दिख रहा है। भगवा परिवार भी इस मुद्दे को पिछले मुद्दों से ध्यान बंटाने और अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने के रूप में देख रहा है।
इसे ध्यान में रखते हुए ही भगवा परिवार ने अपनी रणनीति बनाई है। यह तय हुआ है कि मामले को संवैधानिक राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए सभी नेता आक्रामक रहेंगे।
हालांकि, संसद सत्र में विपक्षी हमले की धार कुंद करने की कवायद में सियासी दलों से बातचीत की कमान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हाथ में लेने का निर्णय लिया है। मोदी खुद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुला सकते हैं।