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सलाखों में रहने वाले सद्दीक के कारनामे जानकर चौंक जाएंगे आप

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जेल के अफसर सद्दीक की करतूतों से अंजान नहीं थे, बल्कि इस वीआईपी बंदी को जरूरत की सभी चीजें जेल के कारिंदों की ओर से ही मुहैय्या कराई जा रही थीं। हद ये थी कि सद्दीक जेल के कंप्यूटर का इस्तेमाल करता था, इस पर नेट यूज करता था और सलाखों में होने के बावजूद इंटरनेट पर पूरी दुनिया की सैर कर रहा था।
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जेल में कैद होने के बाद भी सद्दीक सरकारी कंप्यूटर के जरिए सोशल साइट्स पर सक्रिय था। वो जेल अफसरों का चहेता था लिहाजा उसे राइटर भी बनाया गया था। राइटर होने के नाते उसकी पहुंच जेल के रिकार्ड तक भी थी। वो जेल में हास्पिटल के रिकार्ड को खुद ही अपडेट करता था। यहां तक कि जेल हास्पिटल का स्टाफ उसी के इशारे पर काम करता था। एक बार वो जेल अस्पताल की सरकारी दवाओं को बाहर भेजते वक्त रंगे हाथ पकड़ा गया था लेकिन जेल अफसर मामले को दबा गए।

जेल में बंद एक नेता से भी सद्दीक की नजदीकियां रही हैं। जेल आने से पहले तो वो संभल के एक कद्दावर सपा नेता का करीबी रहा ही है। डीएम के छापे में सद्दीक के पास से जब आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए तो आईबी समेत तमाम एजेंसियां हरकत में आ गईं। लेकिन जेल सूत्रों का कहना है कि उसकी संदिग्ध गतिविधियों से जेल का अमला अंजान नहीं था। पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, चिप, सिम सब कुछ के बारे में जेल अफसर जानते थे। बल्कि उनकी नजरों के सामने ही खुलेआम वो इंटरनेट का इस्तेमाल करता था। लेकिन सियासी रसूख की वजह से कभी सद्दीक को टच नहीं किया गया।
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सद्दीक बोला, मेरे घर के पास है बीएसएफ कैंप

सद्दीक खुफिया एजेंसियों को गच्चा देने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। अपने पास से बरामद बीएसएफ कैंप के नक्शे की बाबत सद्दीक ने कहा है कि नक्शें में अंकित बीएसएफ कैंप उसके गांव के पास है। खुफिया एजेंसियों को सद्दीक ने बताया है कि उसने अपने एक दोस्त को अपने घर भेजा था लिहाजा नक्शे पर रूट बनाकर उसे दिया था।

सद्दीक ने खुफिया एजेंसियों को पूछताछ में बताया है कि पश्चिमी बंगाल के दिनाचपुर जिले में उसका गांव बार्डर के पास स्थित है। गांव के पास ही बीएसएफ का कैंप है। सद्दीक ने एजेंसियों को बताया है कि जेल में रहने के दौरान उसकी दोस्ती मुनिदेव नाम के एक बंदी से हो गई थी। यह बंदी कुछ दिन पहले जब जेल से रिहा हुआ तो उसने वादा किया कि वो सद्दीक के घर जाकर उसके परिवार से मिलेगा।

सद्दीक का एजेंसियों से दावा है कि मुनिदेव को अपने घर का पता समझाने के लिए ही उसने बीएसएफ कैंप का नक्शा बनाया था ताकि मुनिदेव आसानी से उसके गांव तक पहुंच सके। दिल्ली में राजीव चौक से नेशनल स्टेडियम - राष्ट्रपति भवन होते हुए कई रूट के नक्शों की बाबत उसने सद्दीक ने एजेंसियों को बताया है कि उसने ये नक्शा एक मैगजीन से काटा था, मैगजीन में रूट डायवर्जन के लिए यह नक्शा छपा था। जेल अधिकारियों का भी कहना है कि बरामद नक्शा राष्ट्रपति भवन का नहीं बल्कि रूट का था जिसमें राजीव चौक, नेशनल स्टेडियम, राष्टपति भवन समेत कई महत्वपूर्ण स्थल भी रास्ते में पड़ते हैं।
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सद्दीक से सच नहीं उगलवा सकी एजेंसियां

जिला जेल में आपत्तिजनक दस्तावेजों के साथ पकड़ा गया सद्दीक सच बताने के बजाए खुफिया एजेंसियों को लगातार घुमा रहा है। एजेंसियां पिछले 72 घंटे में उससे यह नहीं उगलवा सकी हैं कि उसके पास बीएसएफ कैंप और दिल्ली में महत्वपूर्ण रूटों के नक्शे कहां से आए और इन्हें जुटाने के पीछे उसकी मंशा क्या थी। पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, चिप और सिम की हकीकत भी सामने नहीं आई है।

रविवार को डीएम दीपक अग्रवाल और प्रभारी एसएसपी प्रबल प्रताप सिंह के जेल पर छापे के दौरान सद्दीक नजरों में चढ़ा था। उसके पास से तमाम आपत्तिजनक दस्तावेज मिले थे। पश्चिम बंगाल में बार्डर एरिया के जिले दिनाचपुर के बीएसएफ कैंप का नक्शा और दिल्ली के राजीव चौक से लेकर राष्ट्रपति भवन होते हुए कई महत्वपूर्ण रूटों का नक्शा भी सद्दीक के पास मिला था।

उसके पास से तीन रजिस्टर मिले थे जिनमें बंगाली भाषा में संदेश दर्ज हैं। रविवार दोपहर से ही आईबी, स्पेशल ब्रांच और एलआईयू की टीमें सद्दीक को फिल्टर कर रही हैं। दिल्ली से भी आईबी और स्पेशल ब्रांच की टीमें जेल पर डेरा डाले हुए हैं। सद्दीक जुबान खोलने को तैयार नहीं है। उससे लगातार पूछताछ की जा रही है और उसे बाकी बंदियों से अलग रखा गया है। दूसरी ओर पुलिस इस मामले में ढिलाई बरत रही है। पुलिस ने 72 घंटे बाद भी बंदी सद्दीक के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है।
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