डिस्कोथेक बीयर बार और रियल स्टेट जैसे कारोबार से जुड़े नोएडा के सचिन दत्ता, अब सच्चिदानंद गिरि को महामंडलेश्वर पद से बर्खास्त कर दिया गया है।
पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के मोरी, दारागंज, इलाहाबाद स्थित मुख्यालय के पैड पर जारी पत्र के मुताबिक त्रयंबकेश्वर, नासिक में हुई पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय के बाद विवादित होने के कारण सच्चिदानंद गिरि को निष्कासित कर दिया गया है।
महंत रवींद्र पुरी और महंत दिनेश गिरि के मुताबिक इस आशय की सूचना अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को दे दी गई है।
वहीं नासिक से फोन पर बातचीत में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट पर सच्चिदानंद गिरि पर लगे कई आरोप सही पाए गए।
संन्यासी होने के बाद भी उनका रियल स्टेट जैसे कारोबार से जुड़े रहना और घर-परिवार से नाता रखना, आना-जाना संन्यास की परंपरा को खंडित करता है।
पद की मर्यादा के लिए नहीं हैं ठीक
कुल मिलाकर उनका कार्यव्यवहार महामंडलेश्वर पद की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। ऐसे में उनका महामंडलेश्वर जैसे पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। अब उनकी इच्छा है कि जिस रूप में चाहें, रहें।
इससे पहले निरंजनी के सचिव और अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने नासिक पहुंचकर अखाड़े के वरिष्ठ सदस्यों, पदाधिकारियों और श्रीमहंतों के साथ सच्चिदानंद मुद्दे पर विचार-विमर्श किया।
कार्यकारिणी की बैठक में ही सच्चिदानंद मुद्दे के लिए बनाई गई जांच समिति के सदस्यों ने रिपोर्ट पेश की जिस पर चर्चा के बाद सर्वसम्मति से उन्हें महामंडलेश्वर पद से बर्खास्त किए जाने का निर्णय लिया गया।
अब वह अखाड़े की पेशवाई, शाही स्नान सहित किसी भी तरह के धार्मिक अनुष्ठान में किसी पद या पदवी के साथ शामिल नहीं हो सकेंगे। इसी के साथ सच्चिदानंद को लेकर गुरुपूर्णिमा से शुरू विवाद पर फिलहाल विराम लग गया है।
गुरु पूर्णिमा को बनाया गया था महामंडलेश्वर
गुरुपूर्णिमा पर्व के तहत मठ बाघंबरी गद्दी में नोएडा के कारोबारी सचिन दत्त्ता को निरजंनी अखाड़े के महामंडलेश्वर सच्चिदानंद गिरि की पदवी दी गई थी। इससे पहले महंत स्वामी नरेंद्र गिरि की ओर से उन्हें शिष्य बनाकर सन्यास दीक्षा दी गई थी।
मठ में हुए समारोह में सचिन के गुरु और अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव, पर्यटन मंत्री ओम प्रकाश सिंह सहित गणमान्य नागरिक, साधु-संत मौजूद थे।
महामंडलेश्वर बनाए जाने के बाद सच्चिदानंद गिरि की ओर से पहले त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान मंदिर और फिर बाघंबरी गद्दी मठ में भी फूल बरसाए गए थे जो चर्चा का विषय बना।
आरोपों के बाद गठित की गई थी जांच कमेटी
नोएडा के कारोबारी सचिन दत्त्ता उर्फ सच्चिदानंद गिरि के पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के महामंडलेश्वर बनने और उनसे जुड़ी कई तरह की जानकारियां सामने आने पर बवाल मच गया था।
डिस्कोथेक और रियल स्टेट कारोबार से उनके जुड़ाव केआरोपों के बाद अखाड़े की ओर से श्रीमहंतों की जांच कमेठी बनाई गई थी जिसे सच्चिदानंद गिरि के पारिवारिक और कारोबारी रिश्तों की जांच करके रिपोर्ट सौंपनी थी।
निरंजनी के सचिव और अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा था,जांच समिति की ओर से उनके परिवार या कारोबार से जुड़ाव जैसी मुद्दों की जांच की जाएगी, मामला सामने आया तो उन्हें अखाड़े से अलग कर दिया जाएगा। बृहस्पतिवार को रिपोर्ट आने के बाद यह कार्रवाई कर दी गई।