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बेकाबू हुए अंतरिक्ष यान के धरती पर गिरने का खतरा

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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) तक जरूरी सप्लाई लेकर जा रहा रूस का एक मानवरहित अंतरिक्ष यान काबू से बाहर हो गया है और अब यह धरती की ओर आ रहा है।
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माना जा रहा है कि यह यान कभी भी धरती पर गिर सकता है। इसके बचने की उम्मीद बेहद कम बताई जा रही है।

अंतरिक्ष यान की यह विफलता रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ‘रोकोस्मॉस’ के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इस समय चीन के दौरे पर पहुंचे रूस के उप प्रधानमंत्री और अंतरिक्ष अभियान की कमान संभालने वाले दिमित्री रोगोजिन ने ट्विटर के जरिए चिंता जताते हुए कहा कि वह लगातार यान पर नजर रखे हुए हैं।

मंगलवार को लांच हुआ था प्रोग्रेस एम-27एम

रूसी यान सोयूज के जरिए मंगलवार को ही प्रोग्रेस एम-27एम नाम के इस अंतरिक्षयान को सफलतापूर्वक लांच किया गया था, जिस पर आईएसएस पर मौजूद छह अंतरिक्ष यात्रियों के लिए तकरीबन ढाई टन खाने के जरूरी सामान और उपकरण थे।

मगर, जल्द ही इसमें खराबी आ गई और यह भटककर गलत कक्षा में प्रवेश कर गया।

बाद में इसका संपर्क अंतरिक्ष केंद्र से भी टूट गया। रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के प्रवक्ता मिखाइल फेदेयेव ने फिलहाल कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक नियंत्रण खोने के बावजूद यह अंतरिक्ष यान धरती पर कहां गिरेगा, इस बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं दी जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि अंतरिक्ष से धरती के वायुमंडल के संपर्क में आते ही यान के ज्यादातर हिस्से जलकर खाक हो जाएंगे।

अंतरिक्षयान को बचाने की कोशिशें हुईं बेकार

फिलहाल अपने यान के गिरने के बारे रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि रूसी अंतरिक्ष एजेंसी से जुडे़ एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘यह गिरना शुरू हो गया है। यह कहीं भी जा सकता है। यह साफ है कि अब यह यान पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुका है।

हालांकि इस अभियान से जुडे़ रूसी अधिकारी इसे भरसक बचाने के लिए इससे संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं।’ रूसी अधिकारियों ने पहले तो इस यान से संपर्क साधने की बेइंतिहा कोशिश की थी, मगर वे विफल रहे।

मिशन कंट्रोल के एक प्रवक्ता ने बताया कि इसे बचाने की कोशिश विफल रही। अभियान को कंट्रोल करने वाले विशेषज्ञों ने मंगलवार को ही यान की उड़ान योजना में बदलाव का विकल्प चुना था, जिसके तहत पहले के छह घंटे के बजाय इसके सफर की अवधि दो दिन की गई। मगर यह भी कोशिश नाकाम साबित हुई।
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गुरुवार को आईएसएस पर पहुंचने वाला था यान

यह यान 30 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचने वाला था, जहां छह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्री इसका इंतजार कर रहे थे। 1961 में अंतरिक्ष में पहली बार किसी मानव को भेजने वाले रूसी अंतरिक्ष कार्यक्रम के कामयाबी के किस्से दुनियाभर में चर्चित हैं।

इससे पहले रूस ने पहला स्पुतनिक उपग्रह भी भेजकर अंतरिक्ष की दुनिया में अपने झंडे गाडे़ थे। मगर हाल के वर्षों में रूसी अंतरिक्ष कार्यक्रम को कई झटके भी लगे हैं।

2011 में भी इसी तरह के एक खर्चीले उपग्रह और आपूर्ति यान को भी विफलता का सामना करना पड़ा था। लांच होने के कुछ देर बाद ही यह यान साइबेरिया में जा गिरा था।
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