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धर्म संसद: 'देशभर के मंदिरों से हटाई जाएं साईं मूर्तियां'

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कवर्धा छत्तीसगढ़ की धर्म संसद में साईं को भगवान न मानने के प्रस्ताव पर मुहर के बाद अखाड़े उसके क्रियान्यवन को सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने तय किया है कि सनातन मंदिरों से साईं की मूर्तियां अलग की जाएंगी।
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अखाड़ों के संतों का कहना है कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निर्देशानुसार उनका यह अभियान शांति पूर्वक चलाया जाएगा।

अखाड़े के संतों का कहना है कि सनातनी परंपरा के मंदिर में वेदों पुराणों में वर्णित देवी, देवताओं के साथ साईं प्रतिमा को स्थापित करने और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजने पर रोक लगाने के लिए मंदिरों के संचालकों से अनुरोध किया जाएगा।

उनसे सनातन धर्म में घालमेल न करने का संकल्प लिया जाएगा। उनका यह भी कहना है कि धीरे-धीरे वातावरण बदलेगा और लोग साईं के बारे में अपनी धारणा बदलेंगे।

एक महीने में बने राम मंद‌िर

निरंजनी अखाड़े के सचिव एवं बाघम्बरी मठ गद्दी के महंत स्वामी नरेंद्र गिरि ने कहा कि प्रयाग सहित देश भर के मंदिरों जिनमें साईं प्रतिमा स्थापित की गई है, की सूची बनाई जा रही है। मंदिर के संचालकों से संपर्क किया जा रहा है।

अग्नि अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी रामकृष्णानंद ने स्पष्ट कहा कि शंकराचार्य ने जो निर्णय लिया है अखाड़ों को स्वीकार्य है। साईं भगवान नहीं हैं और उनकी पूजा सनातनी परंपरा से न हो इसके लिए भी अभियान चलेगा।

ज्ञात हो शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा दिया गया बयान कि साईं भगवान नहीं पर धर्म संसद की मुहर लग गई है।

कवर्धा छत्तीसगढ़ में पुरी पीठ, शृंगेरी पीठ एवं कांचीकामकोटि के शंकराचार्यों के प्रतिनिधियों, भारत साधु समाज, वैष्णव संतों एवं सभी तेरहों अखाड़ों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में यह निर्णय काशी विद्वत परिषद के विद्वानों ने लिया।

धर्मसंसद में गंगा की अविरल, निर्मल, राममंदिर, गौहत्या, नारी सम्मान रक्षा आदि पर भी प्रस्ताव पारित किया गया।
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साईं भक्तों को मंच से भगाया

छत्तीसगढ़ के कवर्धा में चल रही धर्म संसद में मंच पर चढ़े संत जोर-जोर से चिल्लाने लगे और क्रोधित होकर दो साईं भक्तों को भगाने लगे। ये साईं भक्त अपनी बात रखने के लिए मंच पर चढ़ गए थे।

सफेद कपड़े पहने एक साईं भक्त ने माइक हाथ में ले लिया और कहा कि वह शंकराचार्य के खिलाफ अनशन करेगा।

इस पर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के समर्थक उत्तेजित हो गए। एक संत ने माइक छीन लिया और कहा कि ये लोग हिंदू धर्म को चुनौती दे रहे हैं। कुछ वक्त बाद उन दोनों साईं भक्तों को वहां से लगभग खदेड़ दिया गया। उन्हें अपनी बात पूरी नहीं करने दी गई।

द्वारका पीठ के शंकरचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कुछ वक्त पहले कहा था कि हिंदुओं को साईं की पूजा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने साईं भक्तों को कोसते हुए कहा था कि वे हिंदू धर्म को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

इस बयान पर खासा विवाद हुआ था। कई नेताओं ने भी इसके पक्ष और विपक्ष में बयान दिए थे।
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