भाजपा भले ही यह दावा कर रही है कि उसने पार्टी के शिखर पुरुष लालकृष्ण आडवाणी को उनकी इच्छा के मुताबिक लोकसभा सीट से चुनाव लडऩे का आग्रह किया, जिसे मानकर आडवाणी ने गांधीनगर सीट से चुनाव लडऩे का फैसला किया।
लेकिन हकीकत यह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन राव भागवत ने आडवाणी को साफ कह दिया था कि या तो वह गांधीनगर से चुनाव लड़ें या घर बैठ जाएं।
इसके बाद आडवाणी ढीले पड़े और बीच का रास्ता नरेंद्र मोदी ने राजनाथ सिंह से बयान दिलवाकर कि आडवाणी भोपाल या गांधीनगर जहां से चाहें चुनाव लड़ सकते हैं, निकाला। आडवाणी के झुकने के बाद उनकी मिजाज पुर्सी के लिए भागवत फिर उनसे मिलने उनके घर भी गए।
आडवाणी के साथ शिवराज को भी नसीहत
यह जानकारी देने वाले संघ के बेहद भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि आडवाणी का कद छांट कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के सभी नेताओं को संदेश दे दिया है कि संघ और संगठन से ऊपर कोई नहीं है।
यही नहीं संघ नेतृत्व द्वारा आडवाणी के लिए भोपाल लोकसभा सीट का मंच सजाने वाले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी नसीहत दी गई कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री बने रहना है तो सिर्फ लोकसभा चुनाव में राज्य में अधिकतम सीटें जिताने पर ध्यान दें।
संघ ने संभाली लोकसभा की कमान
संघ सूत्रों के मुताबिक कि संघ नेतृत्व ने तय कर लिया है कि लोकसभा चुनावों की पूरी कमान वह अपने हाथ में रखेगा। इसलिए जब भाजपा में टिकटों के बंटवारे पर मंथन हो रहा था तो सर संघचालक मोहन भागवत, सर कार्यवाह सुरेश राव भैया जी जोशी अपने कुछ वरिष्ठ संघ पदाधिकारियों के साथ केशवकुंज झंडेवाला दिल्ली स्थित संघ मुख्यालय में डेरा डालकर बैठ गए थे।
संघ नेताओं को जब आडवाणी की भोपाल से चुनाव लडऩे की जिद और भोपाल सीट को आडवाणी के लिए कैलाश जोशी से खाली कराने में शिवराज सिंह चौहान की भूमिका की जानकारी मिली तो पहले उन्होंने भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मामले को सुलझाने को कहा।
लेकिन बात जब ज्यादा बढ़ी और आडवाणी मानने को राजी नहीं थे, तो खुद भागवत ने फोन करके आडवाणी से कहा कि उनके जैसे वरिष्ठतम नेता को यह व्यवहार शोभा नहीं देता। इससे पार्टी की बहुत क्षति हो रही है। आप या तो गांधी नगर से चुनाव लड़ें या फिर घर बैठ जाएं। जो नुकसान होगा हम सहन कर लेंगे।
और इस तरफ मान गए आडवाणी
भागवत के इस कड़े निर्देश के बाद आडवाणी ढीले पड़े और बीच का रास्ता निकालने के लिए नरेंद्र मोदी उनसे मिलने घर पहुंचे। आडवाणी ने उनसे कहा कि वह गांधीनगर से ही लड़ेंगे लेकिन पार्टी उन्हें सम्मानजनक रास्ता दे। तब मोदी ने संघ प्रमुख से इसकी मंजूरी मांगी।
संघ ने मंजूरी देते हुए शर्त रखी कि आडवाणी गांधीनगर से चुनाव लडऩे का लिखित बयान देंगे। इसके बाद मोदी ने राजनाथ से बात की और राजनाथ जो चेन्नई में थे, उन्होंने मीडिया में बयान दिया कि आडवाणी जी पार्टी के आदरणीय और मार्गदर्शक नेता हैं, वह जहां से भी चुनाव लडऩा चाहेंगे, पार्टी उन्हें वहीं से लड़ाएगी।
बयान आने के बाद आडवाणी ने शाम को लिखित बयान जारी करके गांधीनगर से चुनाव लडऩे का ऐलान किया।