वंजारा चिट्ठी बम से भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष स्तर पर घमासान मच गया है।
जहां वंजारा के चिट्ठी बम की आड़ में पार्टी के कुछ दिग्गज नेता नरेंद्र मोदी की राह में कांटे बिछाने में जुट गए हैं, वहीं मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित करके भाजपा को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला कर चुका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मोदी की राह के कांटे बीनने में जुट गया है।
नौ और दस सितंबर को दिल्ली में होने वाली संघ भाजपा की महत्वपूर्ण बैठक में इस मुद्दे पर खासी रस्साकसी होने की संभावना है। क्योंकि वंजारा बम की आड़ में नितिन गडकरी जैसी कहानी मोदी के साथ भी दोहराने की कवायद भाजपा में मोदी विरोधी भी खेमा जुट गया है।
पार्टी में मोदी विरोधियों के तेवरों को नरम करने के लिए ही संघ की सलाह पर मोदी ने प्रधानमंत्री पद के सपने न देखने और 2017 तक गुजरात की सेवा करने के जनादेश मिलने का बयान देकर अपनी पेशबंदी कर ली है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के शिखर पुरुष लाल कृष्ण आडवाणी, बुजुर्ग दिग्गज मुरली मनोहर जोशी, लोकप्रिय चेहरा मानी जाने वाली सुषमा स्वराज जैसे नेता पहले से ही कहते रहे हैं कि जल्दबाजी और दबाव में मोदी के नाम की घोषणा अभी ना की जाए।
आडवाणी चाहते हैं कि प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के नाम का फैसला नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद हो। वंजारा पत्र बम ने उन्हें और मौका दे दिया है। वेंकैया नायडू, अनंत कुमार, जसवंत सिंह भी खामोशी से आडवाणी की राय पर मुहर लगाते दिखते हैं।
जबकि अध्यक्ष राजनाथ सिंह मोदी के लिए सहमति बनाने में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी पार्टी नेताओं और संघ नेतृत्व तक से विधानसभा चुनावों के बाद प्रधानमंत्री के उम्मीदवार का नाम घोषित करने का अनुरोध किया है। शिवराज को आडवाणी और सुषमा के बेहद करीबी माना जाता है।
उधर राज्यसभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी का नाम जल्दी घोषित करने का दबाव बढ़ा दिया है। जेटली ने नाम तय होने में हो रही देरी और इस विवाद को लेकर पार्टी के हिट विकेट होने के प्रति भी आगाह करने वाला बयान देकर मोदी का रास्ता आसान करने की कोशिश की है।
बताया जाता है कि कुछ दिन पहले संघ और भाजपा नेताओं के साथ हुई बैठक में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि लोकसभा चुनावों तक उनके खिलाफ तमाम आरोपों को उछालने की होगी लेकिन विचलित होने की जरूरत नहीं है।
तब संघ के एक वरिष्ठ नेता ने सवाल किया था कि जब गडकरी के खिलाफ झूठे आरोप से भाजपा समेत पूरा संघ परिवार विचलित हो गया था तो अब अगर ऐसा हुआ तो क्यों नहीं विचलित होंगे?
संघ सूत्रों का कहना है कि गडकरी मामले में मात खा चुके सर संघचालक मोहन भागवत मोदी को लेकर अपने फैसले में कोई चूक नहीं होने देना चाहते हैं। लेकिन संघ नेता मानते हैं कि बाधाएं भी कम नहीं हैं।