विधानसभा और लोकसभा के चुनावों को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की प्रतिनिधि सभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह सहित कई अन्य बड़े पदाधिकारियों की उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सभा के दौरान संघ व भाजपा पदाधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने को लेकर कई बार गंभीर चर्चाएं भी हुईं। संघ के सर संघचालक मोहन भागवत सहित आला पदाधिकारियों ने भाजपा को हिंदुत्व के मुद्दे को मजबूती से पकड़ कर रखने और उठाने की नसीहत दी।
संघ का मानना है कि बिना राजनीतिक ताकत के वह अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर सकता, वहीं भाजपा जानती है कि चुनावों में वह अपनी मजबूत दावेदारी संघ के सहारे ही पेश कर सकती है।
भाजपा ने संघ को आश्वस्त किया है कि प्रतिनिधि सभा में पारित पाकिस्तान-बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार रुकवाने, दोनों देशों से आने वाले हिंदू शरणार्थियों को सुविधा व नागरिकता दिलाने, रामसेतु तोड़ने की सरकार की मंशा का विरोध करेगी व राम मंदिर जैसे मुद्दों को उचित मंचों पर उठाएगी। साथ ही, संगठन की ओर से इन मुद्दों पर संघ की ओर से चलाए जाने वाले अभियान व आंदोलनों में भी पूरा साथ दिया जाएगा।
एक दूसरे का साथ देने का वादा
पहले कर्नाटक में, फिर इसी वर्ष के अंत में राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ राज्यों में विधानसभा चुनाव तथा अगले वर्ष लोकसभा चुनाव होने वाले हैं।चर्चाएं यहां तक चल रही हैं कि विधानसभा चुनावों के साथ लोकसभा चुनाव भी हो सकते हैं।
सूत्रों ने बताया कि ऐसे माहौल के बीच राजनीतिक हलकों में प्रतिनिधि सभा के दौरान भागवत, संघ के सर कार्यवाहक भैयाजी जोशी, सह सर कार्यवाहक सुरेश सोनी, कृष्णगोपाल सहित बड़े पदाधिकारियों और भाजपा के राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी. सतीश व सौदन सिंह के बीच मंत्रणा का असर भाजपा के चुनावी कार्यक्रमों और योजनाओं में देखने को मिल सकता है।
चुनावों से पहले संघ की सभा को आखिरी बड़ी बैठक माना जा रहा है। इस बड़ी सभा में भाजपा को दी गई हिंदुत्व पर मजबूती से लौटने की नसीहत का खासा असर देने को मिल सकता है। वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में संघ ने भाजपा को चुनावों में एकजुट होकर सहारा देने का भी आश्वासन भी दिया है।
मंथन को अंतिम रूप देने की कवायद
संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के समाप्त होने के बाद भागवत सहित अन्य बड़े पदाधिकारी जयपुर में ही रुके हुए हैं। सूत्रों ने बताया कि वे 15 से 17 मार्च तक हुई सभा के निचोड़ के मुताबिक पूरे साल के कार्यक्रम एवं कार्य योजना जारी करने के काम को अंतिम रूप दे रहे हैं।
सभा के बाद अधिकतर प्रतिनिधि लौटने शुरू हो गए, लेकिन बड़े पदाधिकारी योजना तैयार करने के साथ ही दिशा-निर्देश भी जारी करेंगे। संघ प्रमुख मोहन भागवत 20 मार्च तक जयपुर में ही रहेंगे।