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मोदी सरकार के दो फैसलों से संघ परिवार नाराज, खोला मोर्चा

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आम बजट को लेकर प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री बेशक अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, मगर संघ परिवार के संगठनों ने बजट प्रावधानों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। अब सरकार के अपने संगठनों के जरिए ही मोर्चा खोल देने के बाद विपक्ष को भी बैठे-बिठाए मुद्दा हाथ लग गया है।
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वित्त मंत्री अरुण जेटली के जरिए पीएफ फंड निकासी पर टैक्स लगाए जाने के निर्णय को लेकर भारतीय मजदूर संघ ने विरोध जताया है। तो खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में विदेशी निवेश की सीमा 100 प्रतिशत किए जाने के कदम को लेकर स्वदेशी जागरण मंच के तेवर तल्ख हैं। भारतीय किसान संघ ने आम बजट के किसान एवं गरीब हितैषी होने पर संतुष्टि तो जताई है। मगर किसानों को बड़ी राहत न मिलने से वे भी आहत हैं।

भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय महासचिव ब्रजेश उपाध्याय ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि पीएफ निकासी पर कर लगाने का सरकार का फैसला कर्मचारी विरोधी है। सरकार को इसे जल्द वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर फैसला वापस लेने की मांग करेंगे। बात नहीं बनी तो कदम का विरोध होगा।
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वहीं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में विदेशी निवेश की सीमा 100 प्रतिशत किए जाने के फैसले को स्वदेशी जागरण मंच सीधे खुदरा बाजार से जोड़कर देख रहा है। स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि सरकार ने विदेशी निवेशकों को वायदा पूरा करने का संदेश देने के लिए यह कदम उठाया है। लेकिन उसे यह भी ध्यान रखना चाहिए कि देश की जनता से किया गया वायदा भी पूरा करना है।

खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के मामले पर पीएम मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली के पुराने कदम की याद दिलाते हुए महाजन ने कहा है कि खुद मोदी जी ने खुदरा क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश के खिलाफ स्वदेशी जागरण मंच के भारत बंद का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि दो माह पहले भी पीएम ने खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के मामले पर पुरानी प्रतिबद्धता जताई थी। तो वित्त मंत्री बनने से पहले इन्ही अरुण जेटली ने खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा सौ फीसदी किए जाने के फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि इसके लागू होने से हमारे युवक दुकानदारी से।

सरकार के इस फैसले पर आश्चर्य जताते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि वे हैरान है कि कैसे सरकार ने अपनी स्थिति इस मामले पर बदली हैं। उधर भारतीय किसान संघ के एक शीर्ष अधिकारी भी आम बजट को लेकर असंतुष्ट नजर आए। बजट के कृषि हितैषी होने का उन्होंने स्वागत तो किया है। साथ में यह भी जोड़ा है कि दो साल से लगातार मौसम की मार झेल रहे किसानों को कुछ बड़ी राहत मिलनी चाहिए थी।
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