अमित शाह की बतौर भाजपा अध्यक्ष नई पारी पर किंतु-परंतु की गुंजाइश करीब-करीब खत्म हो गई है। उनके खिलाफ पार्टी की बुजुर्ग सेना की ओर से छेड़ी गई मुहिम को न तो पार्टी में बड़ा समर्थन मिला और न ही संघ साथ में खड़ा हुआ। बुजुर्गों को उम्मीद थी कि उनके इस अभियान को दूसरी पंक्ति के कुछ ताकतवर नेताओं का साथ मिलेगा लेकिन समर्थन तो दूर, ये नेता उल्टे शाह के बचाव में खड़े हो गए।
दरअसल बुजुर्ग सेना की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शाह की ताकतवर जोड़ी के खिलाफ अभियान का सारा दारोमदार दूसरी पीढ़ी के नेताओं और संघ के भावी रुख पर निर्भर था। संघ ने मुहिम शुरू होने के लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी मगर पार्टी की दूसरी कतार के नेता मोदी-शाह के बचाव में मुखर हो गए।
वरिष्ठ नेता वैंकेया नायडू ने बुजुर्गों को पार्टी फोरम पर बात रखने की नसीहत दी तो नितिन गडकरी ने अनुशासन की सीमा रेखा पार करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग कर डाली। मोदी-शाह के बचाव में जारी बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में गृह मंत्री राजनाथ सिंह और अरुण जेटली भी शामिल थे।