कभी लाल कृष्ण आडवाणी की अयोध्या रथ यात्रा रोक कर उन्हें गिरफ्तार करने वाले आरके सिंह अब उन नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं जो तब आडवाणी की राम रथयात्रा के सारथी थे।
अपने गृह नगर में चुनावी दंगल में फंसे देश के पूर्व गृह सचिव को आडवाणी रथ के इसी सारथी का सहारा है, वरना इस लोकसभा क्षेत्र लोगों तक पहुंचने और अपनी पहचान बनाने में उन्हें खासी मशक्कत करनी पड़ रही है, जबकि मतदान की तारीख 17 अप्रैल अब बहुत दूर नहीं रह गई है।
राजपूत बहुल बिहार के इस खांटी भोजपुरी भाषी लोकसभा क्षेत्र में जनता दल(यू) की उम्मीदवार मीना सिंह जो मौजूदा सांसद भी हैं, एक तरफ सिंह के राजपूत जनाधार में बंटवारा कर रही हैं, तो जनता दल (यू) छोड़ कर राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी बने भगवान सिंह कुशवाहा जातीय गणित में दोनों पर खासे भारी पड़ रहे हैं।
भाजपा को मिल रहा युवाओं का समर्थन
इलाके के लोग अभी आरके सिंह के बारे में जानते भी नहीं है, सिर्फ यही कहते हैं कि कमल छाप ने दिल्ली से आए किसी बाबू साहब को मैदान में उतारा है।
आरा शहर में घुसने पर अहसास होता है कि यह उन वीर कुंवर सिंह की धरती है जिन्होंने 80 साल की उम्र में आजादी की पहली लड़ाई में अंग्रेजों के दांत खट्टे किए थे।
कुंअर सिंह इस इलाके के जगदीशपुर के ही रहने वाले थे। सड़क पर खड़े कुछ नौजवानों से बात होती है। ये युवक भाजपा समर्थक हैं और बताते हैं कि मोदी और कमल का जोर है। लेकिन यह पूछने पर कि भाजपा का उम्मीदवार कौन है, वह कहते हैं कि हमें नहीं पता लेकिन जो भी होगा, वोट हम कमल को देंगे।
आरके सिंह को मिलेगी कड़ी टक्कर
राजपूत बिरादरी के यह नौजवान अपना नाम वीरेंद्र सिंह और रमेश कुमार सिंह बताते हैं। आगे चलने पर रितेश कुमार कुशवाहा से बात होती है। वह बताते हैं कि भाजपा का जोर तो है, लेकिन राजद के भगवान सिंह कुशवाहा सबसे आगे चल रहे हैं।
उनकी इस बात की ताईद पास में खड़े उमेश सिंह कुशवाहा भी करते हैं। मीठे पेड़ों के लिए मशहूर सकट्टी में भी लोग राजद और भाजपा का मुकाबला बताते हुए लालटेन छाप कुशवाहा का ज्यादा जोर बताते हैं।
आरा से निकलकर भोजपुर, गिद्धा, कायमनगर, धरहरा, सलथर, हरिगांव, दुलहिनगंज होते हुए कवरामठिया तक करीब करीब यही तस्वीर मिलती है।
नौजवान विनय सिंह लालटेन छाप का जोर बताते हैं तो पास बैठे बुजुर्ग कहते हैं कि तीर छाप यानी जनता दल(यू) का जोर है। नाम पूछने पर बुजुर्ग ठेठ भोजपुरी में कहते हैं नाम न बतावब बा जेल फांसी हुई जाई।
त्रिकोणी होगा मुकाबला
दूर दूर तक खेतों में गेहूं की फसल पक चुकी है और सड़क के दोनों ओर खेतों में कटाई हो रही है। खलिहानों में गेहूं के गट्ठर गिराते हुए किसानों और खेत मजदूरों के बीच चुनाव की चर्चा बेमानी है।
पूछने पर सिर्फ इतना ही कहते हैं अबै कउना फैसला नहीं किया। वोटवा डालैं कै एक दुई दिन पहले तय करब। लेकिन ज्यादा कुरेदने पर अपनी बिरादरी के हिसाब से वोट देने की बात उनके मुंह से निकलती है।
केतापुर, पीलापुर, बभनियान, हाट पोखर, नारायणपुर, जगदीशपुर, नायका टोला कुशवाहा टोला, केशरी, कथुआ, टीक पोखर, करवनियर में चुनावी लड़ाई का रुख त्रिकोणात्मक मिलता है। करवनियर गांव में संतोष कुमार के मुताबिक लड़ाई राजद के कुशवाहा और जद(यू) की मीना सिंह के बीच है।
राजद भी मजबूत
भाजपा उम्मीदवार को अभी तक इलाके में किसी ने नहीं देखा। इन गावों में भाकपा(माले)के उम्मीदवार राजू यादव की भी चर्चा सुनाई देती है।
लेकिन लोग उन्हें लड़ाई में नहीं मानते सिर्फ राजद के कुछ यादव वोटों में सेंध लगाने वाला मानते हैं। इस इलाके के जातीय गणित के मुताबिक आरा लोकसभा क्षेत्र में राजपूत और कुशवाहा वोटों की तादाद सबसे ज्यादा है।
इनके अलावा यादव और भूमिहार वोट भी प्रभावित करते हैं। शेष अन्य जातियों में ब्राह्मण, वैश्य, कायस्थ और अन्य पिछड़ी व दलित जातियां हैं।
जहां राजपूतों, भूमिहारों, वैश्यों, ब्राह्मणों, कायस्थों और कुछ दलित जातियों पर भाजपा दावा कर रही है, जबकि यादव, कुशवाहा, मुस्लिमों पर राजद का दावा है, वहीं जद यू उम्मीदवार को भी राजपूत, मुस्लिम और अति पिछड़ी जातियों का भरोसा है।