बिहार में जदयू और राजद के विलय की प्रक्रिया तेज हो गई है। शनिवार को सत्तारूढ़ जदयू ने आधिकारिक रूप से इसे अपनी मंजूरी दे दी। पार्टी की 189 सदस्यीय राजनीतिक सलाहकार परिषद ने विलय को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। गठन के बाद पार्टी की राजनीतिक सलाहकार परिषद की यह पहली बैठक थी।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हुए। बैठक के बाद नीतीश ने कहा कि विलय के बाद नेता का चुनाव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नए दल का नाम कुछ भी हो सकता है लेकिन एजेंडा सुशासन ही होगा।
सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक में कुछ सदस्यों ने अकेले चुनाव मैदान में जाने की बात कही लेकिन ज्यादातर सदस्यों ने विलय के पक्ष में अपनी राय दी। बैठक के बाद जदयू नेता नीतीश कुमार ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिवेश में विलय ही एकमात्र विकल्प रह गया है।
राजद और जदयू के विकल्प में अब मात्र औपचारिकता बाकी है, जिसे दोनों दल पूरा कर रहे हैं। केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि समाज को बांटने वालों को पराजित करने के लिए हमारा एकजुट होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चोर दरवाजे से अध्यादेश राज चलाने में लगी है। इसके पीछे बड़े कारोबारियों का दबाव है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने योजना आयोग का नाम जरूर बदल दिया लेकिन अब तक यह साफ नहीं किया है कि नीति आयोग काम कैसे करेगा।