टिकट वापसी के नए नियमों की आड़ में रेलवे ने आम यात्रियों की जेब पर कैंची चला दी है।
एक जुलाई से लागू होने वाले नए नियमों के तहत यात्रियों को टिकट वापस या रद्द कराने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।
यही नहीं अब ट्रेन छूटने के दो से तीन घंटे के बाद रेलवे एक पैसे का भी रिफंड नहीं देगा। डुप्लीकेट टिकट पाने के लिए भी यात्रियों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी।
नए नियमों के तहत यात्रियों को अधिकतम रिफंड पाने के लिए ट्रेन छूटने से 48 घंटे पहले टिकट रद्द कराना होगा। पहले यह अवधि 24 घंटे थी।
25 फीसदी रकम काटकर रिफंड पाने के लिए यात्री को ट्रेन छूटने से कम से कम छह घंटे पहले टिकट रद्द करानी होगी। पहले यात्री चार घंटे पहले भी टिकट रद्द करा सकते थे। ट्रेन छूटने के दो घंटे बाद रेलवे कन्फर्म टिकट का पैसा वापस नहीं करेगा।
मौजूदा नियम के तहत अगर सफर 500 किमी से अधिक है, तो ट्रेन छूटने के 12 घंटे के भीतर यात्री टिकट वापस करा सकते हैं।
आरएसी और वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को भी ट्रेन छूटने से तीन घंटे पहले टिकट रद्द करानी होगी, जिसके लिए एक जुलाई से उन्हें 30 रुपये का शुल्क भी अदा करना होगा।
ई टिकट की श्रेणी में वेटिंग लिस्ट और आरएसी की टिकटों पर पहले की तरह पूरा रिफंड मिलेगा।
अगर हड़ताल या अन्य किसी आपदा की वजह से यात्री ट्रेन तक नहीं पहुंच पाता है, तो उसे 10 दिन के भीतर रिफंड के लिए क्लेम करना होगा जबकि पहले यह अवधि 90 दिन थी।
डुप्लीकेट कन्फर्म या आरएसी टिकट के लिए भी यात्री को सेकेंड और स्लीपर क्लास के लिए 50 रुपये और इससे ऊपर की श्रेणी के लिए 100 रुपये चुकाने होंगे।
मंत्रालय के मुताबिक जिन स्टेशनों रात में काउंटर नहीं हैं, वहां पर रिजर्वेशन काउंटर खुलने के पहले दो घंटे रिफंड किया जा सकेगा।