काम के बोझ और तानों से परेशान कई मुसलिम परिवारों की बहुओं ने ससुराल वालों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बहुएं इस बात से नाराज है कि बेटियां घर में आराम फरमाती रहती हैं और उन्हें पूरा काम करना पड़ता है। यहां तक कि ननद और देवर के कपड़े भी धुलने पड़ते हैं, जबकि उनके पास कोई काम नहीं होता। मना करने पर सास-ससुर धमकाते हैं। ससुराल वालों के व्यवहार से आजिज आकर कई मुसलिम युवतियों ने मदरसा बनात-ए-तइबा में इसकी शिकायत की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इसके बाद भी ससुराल वाले नरम नहीं पड़े तो वे देवबंद मदरसे का दरवाजा खटखटाएंगी।
काम के बहाने उत्पीड़न के ढेरों मामले
शौकत अली रोड की रमोना वाहिद की शादी दो साल पहले कीडगंज में हुई थी। रमोना के मुताबिक उनके पति गाजीपुर के एक स्कूल में टीचर हैं, इसलिए वह घर पर हफ्ते में एक दिन ही आते हैं। इसका फायदा उठाकर ससुराल वाले उन्हें परेशान कर रहे हैं। उनकी तीन ननद हैं, लेकिन वे घर का एक भी काम नहीं करतीं। खाना बनाने, घर की साफ-सफाई के साथ ही ननद और देवर तक के कपड़े उनसे धुलवाए जाते हैं।
रमोना ने जब कपड़ा धुलने से इंकार किया तो ससुराल वालों ने दो टूक कह दिया कि अगर घर में रहना है तो सारा काम करना पड़ेगा। रमोना का कहना है कि पिछले छह महीने में उनका वजन सात किलो कम हो गया है। वह अक्सर बीमार भी रहने लगी हैं।
यही हाल शाहगंज की राबिया बानो का है। उनकी शादी डेढ़ साल पहले चकिया में हुई थी। राबिया के मुताबिक शादी के एक हफ्ते के बाद ही उनसे घर का सारा काम कराया जाने लगा। अबकी रमजान में सुबह तीन बजे उठकर घर वालों के लिए वह बीस से ज्यादा रोटी बनाती थीं। उन्होंने अपनी सास से रियायत बरतने को कहा तो उन्होंने इंकार कर दिया। बात बढ़ी तो ससुर ने साफ कह दिया कि बेटियां जब तक घर पर रहेंगी, एक भी काम नही करेंगी।
राबिया कहती हैं कि घर पर पहले एक नौकरानी आती थी, लेकिन शादी के बाद उसे मना कर दिया गया। मिर्जा गालिब रोड की शमायल, पत्थर गली की सामिया की भी यही कहानी है। आजिज आकर उन्होंने भी मदरसा बनात-ए-ताइबा में शिकायत की है।
ससुराल वालों को नरमी बरतने की हिदायत
मदरसे के शिकायत सेल की प्रमुख मुफ्ती रेशमा खानम के मुताबिक तीन महीने में इस तरह की 50 से ज्यादा शिकायतें आई हैं। कई मामलों में बहुओं को सताने की मंशा साफ उभरकर सामने आई है। शरीयत का हवाला देकर ससुराल वालों को खत भेजा गया है, जिसमें बहुओं के साथ नरमी बरतने की बात भी कही गई है। अगर मसले का हल नहीं निकला तो मामले को शहर के बड़े उलेमा के सामने पेश किया जाएगा।
कहां से कितनी आईं शिकायतें
शाहगंज 10
करेली 12
अटाला 08
रसूलपुर 05
रोशनबाग 07
दरियाबाद 09
शरीयत के खिलाफ है यह अमल
बज्म-ए-पैगामे वैहदानियत के अध्यक्ष मुफ्ती महमूद हसन गाजी कहते हैं कि ससुराल में बहुओं से एकतरफा काम कराने के जो मामले सामने आए हैं, वे यकीनन शरीयत के खिलाफ हैं। शरीयत इसकी कतई इजाजत नहीं देती कि बहुएं ननद या देवर के भी काम करें। बीवी सिर्फ शौहर के प्रति जवाबदेह है। अगर वह अपनी खुशी से घर का सारा काम करती है तो अलग बात है।