पतंजलि फूड प्रोडक्ट्स के सैंपल मामले में बाबा रामदेव के संस्थान को मोटा जुर्माना अदा करना पड़ सकता है। प्रत्येक उत्पाद पर 15 लाख रुपये के हिसाब से बाबा की कंपनी को 90 लाख रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं। हालांकि कंपनी के पास रिपोर्ट को चुनौती देने का विकल्प है। इस रिपोर्ट के खिलाफ कोर्ट जाया जा सकता है।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरएस रावत ने बताया कि लेबलिंग और पैकिंग अधिनियम की धारा 52 के तहत किसी भी खाद्य पदार्थ के भ्रामक विज्ञापन के लिए 10 लाख रुपये तक की पेनाल्टी लगाई जा सकती है। वहीं, खाद्य पदार्थों में उनके ब्रांड से कम गुणवत्ता मिलने पर धारा 53 के अंतर्गत पांच लाख रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है। एक सैंपल पर 15 लाख के हिसाब से पतंजलि पर 90 लाख रुपये की पेनाल्टी लग सकती है।
अधिकारियों ने बताया कि सैंपल रिपोर्ट के आधार पर 30 दिन बाद मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे। इससे पहले कंपनी को नोटिस भेजकर उत्पादों की सैंपल रिपोर्ट के बारे में बताया जाएगा। कंपनी को यदि उनकी रिपोर्ट पर विश्वास नहीं है तो वह रिपोर्ट को सक्षम न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं। इसके लिए विभाग की ओर से उन्हें 30 दिन का समय दिया गया है।
‘हमारा विशेष उत्पाद’ लिखवाना बना मुसीबत
पतंजलि को अपने उत्पादों पर विशेष लेबलिंग महंगी पड़ गई। दूसरी कंपनी से सरसों के तेल तैयार कराकर रैपर पर ‘हमारा विशेष उत्पाद’ लिखने को खाद्य सुरक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरएस रावत ने बताया कि दूसरी जगह बने उत्पाद को अपना विशेष उत्पाद बताने पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 52, 53 के तहत मामला बनता है।