भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की ताजपोशी के लिए आध्यात्मिक नगरी काशी में अनूठे जतन हो रहे हैं। मोदी को पीएम बनाने के लिए गुजरात की तीन सौ साल पुरानी सतुआ बाबा पीठ में गोपनीय तरीके से एक-दो नहीं पांच अनुष्ठान कराए जाने का पता चला है।
उनकी राह आसान हो सके, इसके लिए काशी के पुरोहितों और गुजराती पंडितों को मिलाकर कुल सौ से अधिक ब्राह्मण अलग-अलग मंत्रों का जाप, स्तोत्र के पाठ और रुद्राभिषेक कर रहे हैं। कुल 51 लाख मंत्रों से जप पूरा करने का संकल्प लिया गया है।
गुजरात के ही बाबा जेठा पटेल ने कभी सतुआ बाबा आश्रम की काशी में स्थापना की थी।
गुजरात के भक्त करा रहे अनुष्ठान
मोदी को पीएम बनाने की कामना से इन अनुष्ठानों का संकल्प मणिकर्णिका घाट स्थित सतुआ बाबा आश्रम में गुजरात के ही भक्तों ने कराया है। तीन अप्रैल को ही गोपनीय तरीके यह अनुष्ठान यहां शुरू कराया गया था। इसमें मोदी के दीर्घायु जीवन से लेकर उन्हें शक्ति संपन्न बनाने और बाधाओं का शमन करने से संबंधित मंत्रों के जाप और स्तोत्र के पाठ शामिल हैं। महा मृत्युंजय मंत्र के जप के अलावा महाकाल स्तोत्र, चंडी पाठ और रुद्राभिषेक साथ-साथ कराए जा रहे हैं।
सतुआ बाबा आश्रम में अनुष्ठान के आचार्य पं. शशिधर ने बताया कि अब तक मोदी के लिए करीब 11 लाख मंत्रों का जप किया जा चुका है। सुबह सात से दोपहर डेढ़ बजे तक प्रतिदिन वैदिक आचार्यों की टोली मोदी के लिए जप-अनुष्ठान करने में जुटी है।
इस महाअनुष्ठान को पूरा कराने के लिए काशी के पंडितों के साथ गुजराती ब्राह्मण भी बुलाए गए हैं। महेश जोशी, राजगौर मयूर, गौतम जोशी, देवांग जोशी मोदी के निमित्त होने वाले जप के लिए सूरत और कच्छ से आए हैं। इतना ही नहीं, इसी संकल्प के तहत विश्वनाथ मंदिर में भी 11 ब्राहमणों से रुद्राभिषेक कराया जा रहा है, ताकि मोदी को पीएम बनाया जा सके।
अनुष्ठानों का ये है महत्व
काशी में मोदी के लिए चल रहे अनुष्ठानों के पीछे बड़ा आध्यात्मिक महत्व छिपा है। जप और पाठ की व्यवस्था से जुड़े एक आचार्य ने बताया कि चंडी पाठ दुश्मनों को परास्त करने की शक्ति के लिए और महामृत्युंजय मंत्र का जप आतंकवादियों से उनकी जीवन रक्षा के लिए हो रहा है। इसके साथ उनके मार्ग में आने वाली किसी तरह की बाधा के शमन के लिए रुद्राभिषेक कर भगवान शिव को प्रसन्न किया जा रहा है।
महामंडलेश्वर संतोष दास ने बताया कि गुजरात के भावनगर के निवासी बाबा जेठा पटेल ने तीन सौ साल पहले इस सतुआ बाबा पीठ की स्थापना की थी। गुजरात से इस आश्रम का पुराना संबंध है। गुजरात के ही नरेंद्र मोदी के कुछ चाहने वालों ने उनके लिए अनुष्ठान कराने के लिए आश्रम में जगह मांगा था। इस दरबार में आस्था रखने वाले हर भक्त के लिए जगह दी जाती है।