लोकसभा चुनाव के सातवें चरण में 30 अप्रैल को देशभर की 89 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई। इसमें उत्तर प्रदेश का बांदा जिला भी शामिल था। जहां लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस दौरान कुछ छुटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो यहां मतदान शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ।
हालांकि, बुधवार को हुई वोटिंग में बांदा के प्रशासनिक अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। कहा जा रहा है कि यहां के अधिकारियों ने कई लोगों से जबरन वोटिंग कराई। उनके वोटिंग बहिष्कार के बाद भी अधिकारियों ने उनसे मतदान कराया। इसमें सरकारी अधिकारी शामिल हैं।
ग्रामीणों ने किया था मतदान का बहिष्कार
बांदा लोकसभा क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों ने मतदान का बहिष्कार किया था। उन्होंने तय किया था कि वो इस बार वोट नहीं करेंगे। बावजूद इसके इन गांवों में प्रशासनिक अफसरों ने मोर्चा संभाला।
उन्होंने ग्रामीणों पर दबाव बनाकर वोटिंग कराई। अधिकारियों ने खासतौर से शिक्षामित्रों, कोटेदारों, आंगनबाड़ी और पंचायत मित्र समेत सरकारी कर्मियों से जबरन वोट डलवाए।
ईवीएम फूंकने पहुंचा शराबी
30 अप्रैल को हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र में भी वोटिंग हुई। यहां करीब दो दर्जन बूथों पर ईवीएम खराब होने से मतदान बाधित रहा। चित्रकूट के दस्यु प्रभावित क्षेत्रों में भी मतदान शांतिपूर्ण रहा। दस्युओं का फरमान बेअसर देखा गया।
मतदान के दौरान हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र में अजीब वाक्या देखने को मिला। यहां के सुमेरपुर थाना इलाके के धरमपुर गांव में बने मतदान केंद्र पर एक शराबी पेट्रोल लेकर घुस गया। उसने ईवीएम फूंकने की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया।
चुनाव के दौरान चुनाव अधिकारी की मौत
उन्नाव में बुधवार को मतदान के दौरान एक चुनाव अधिकारी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई। लेकिन उनकी मौत रास्ते में ही हो गई।
मृतक चुनाव अधिकारी की पहचान बनवारी लाल शर्मा (59) के रूप में हुई है। वो मूल रूप से अलीगढ़ के रहने वाले थे और सेक्टर मजिस्ट्रेट (सहायक अभियंता) के रुप में पोलिंग सेंटर पर तैनात थे। डॉक्टरों के मुताबिक वह हीट स्ट्रोक के शिकार हो गए।
इसके अलावा कुछ इलाकों में ईवीएम में तकनीकी खामियां भी देखने को मिली। जिसके चलते मतदान पर असर पड़ा। हालांकि कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण रहा और वोटरों ने जमकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।