उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री आनंद सिंह ने कहा है कि सूबे में एक ओर बड़ी संख्या में बच्चे भूखे सोने को मजबूर हैं, दूसरी ओर हर साल 1000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का गेहूं चूहे चट कर जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही जीएम फसलों की खेती के संबंध में फैसला लेगी।
आनंद सिंह ने कहा है कि सिर्फ हठधर्मिता के लिए जेनेटिकली मॉडीफाइड (जीएम) फसलों का विरोध नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर अध्ययन के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की है। टीम की सिफारिशों और किसानों के हित को देखते हुए इस पर फैसला किया जाएगा।
कृषि मंत्री इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पीएचडी चेंबर के संयोजन और कृषि विभाग के सहयोग से आयोजित गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है और बिचौलिये उसका फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने खाद्यान्न भंडारण स्थानों पर खाद्यान्न चोरी की चर्चा करते हुए मंडी समिति को इसकी समीक्षा करने का निर्देश दिया।
दलहनी फसलों को नीलगायों से होने वाले नुकसान का हवाला देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि इसके लिए यूपी सहित पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मिलकर केंद्र से मांग करनी होगी कि वह नीलगाय को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची तीन से निकालकर पांच में डालें। कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) आलोक रंजन ने कहा कि अभी प्रदेश में 40 प्रतिशत फल और सब्जियां सड़ जाती हैं, इसे रोकना होगा।