ताज नगरी ने अमेरिकी दंपति को बेमिसाल सौगात दी है। इसके जरिये मोहब्बत की नगरी का अमेरिका के साथ एक खुशनुमा ‘गुमनाम रिश्ता’ कायम हुआ है। यहां की एक महिला की किराये की कोख से जन्मी जुड़वा बेटियों की किलकारी अब नि:संतान अमेरिकी दंपति के घर आंगन में गूंज रही है। किसी विदेशी दंपति के लिए सरोगेसी का यूपी में पहला केस माना जा रहा है।
सेनफ्रांसिस्को, अमेरिका निवासी आर्किटेक्ट जोजफ (42) और उनकी पत्नी शॉन का (40) शादी के कई सालों बाद भी कोई बच्चा नहीं हो सका। नि:संतान दंपति ने अपने ही शहर में इलाज कराया। चिकित्सकों ने शॉन के गर्भाशय में कमी के चलते किराए की कोख (सरोगेट मदर) से मां-बाप बनने का सुझाव दिया। इस पर अमेरिकी दंपति ने एजेंसी के माध्यम से आगरा की एक शिक्षित महिला से सरोगेसी के लिए लीगल कांट्रेक्ट किया।
यहां मल्होत्रा इनफर्टिलिटी सेंटर में अमेरिकी दंपति के (एम्ब्रो) को सरोगेट मदर के गर्भाशय में नवंबर 2011 में इम्प्लांट किया गया। चिकित्सकों की मॉनीटरिंग के साथ अमेरिकी दंपति भी बीच-बीच में आते रहे। 23 जून 2012 को सीजेरियन डिलीवरी से जुड़वा शिशु (फीमेल) का जन्म हुआ। एंबेसी के माध्यम से जोजफ और जुड़वा शिशु के डीएनए का मैच कराया गया। चार माह की जुड़वा बच्चियों का लालन पालन अब जोजफ और शॉन सेनफ्रांसिस्को में कर रहे हैं।
आशा और जया के साथ दीपावली
जुड़वा बेटियों के साथ जोजफ और शॉन की जिंदगी में खुशियां लौट आई हैं। मल्होत्रा नर्सिंग होम की निदेशक डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि जुड़वा बेटियों के नाम आशा और जया रखे गए हैं। यही नहीं अपने घर में एनआरआई के साथ जॉजफ और शॉन ने भारतीय पर्व और त्योहारों को मनाना शुरू कर दिया है। नवरात्र पर आशा और जया को देवी के रूप में पूजा गया। अब दीपावली भी वे इन्हीं के साथ मनाएंगे। यही नहीं दंपति ने हर साल आगरा आने का फैसला भी लिया है।
ये है सरोगेसी
गर्भाशय में कमी के चलते गर्भधारण न कर पाने वाले दंपति किराये की कोख से जेनेटिक मदर फादर बन सकते हैं। आमिर खान के भी सरोगेसी से बच्चा हुआ है। इसमें लैब में दंपति के स्पर्म और एग से एम्ब्रो तैयार किया जाता है। इसे सरोगेट मदर के गर्भाशय में इम्प्लांट कर दिया जाता है। इस तरह जेनेटिक मदर फादर के शिशु को सरोगेट मदर 9 महीने तक गर्भ में रखती है।