भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 पर अपने बयान की आलोचना के बाद अब बहस का रुख मोड़ने की कोशिश की है।
मोदी ने कहा है कि अनुच्छेद 370 पर तर्कसंगत तरीके से बहस कराने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों की तकलीफों समेत अन्य मुद्दों पर भी बहस होनी चाहिए। रविवार को इस संबंध में उनकी टिप्पणी की जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तीखी आलोचना की थी।
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मोदी ने सोमवार को ट्विटर पर कहा कि जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 पर तार्किक और केंद्रित बहस होनी चाहिए। लेकिन हमें राज्य में रह रहे हर वर्ग के लोगों की तकलीफों पर भी बात करनी होगी।
मोदी ने इस मुद्दे को उठाने का श्रेय लेने की कोशिश करते हुए लिखा है, 'अच्छा लगा कि अनुच्छेद 370 पर बहस की मेरी अपील के बाद इस पर आम लोगों के बीच चर्चा हो रही है। टीवी और सोशल मीडिया पर इस पर बहस हो रही है।'
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मोदी ने रविवार को जम्मू-कश्मीर की महिलाओं के लिए समान अधिकार का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि महिलाओं के साथ कश्मीर में भेदभाव हो रहा है। इस पर उमर ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा था कि मोदी के पास या तो इस मुद्दे पर पूरी जानकारी नहीं है या फिर वह झूठ बोल रहे हैं।
मोदी ने उमर और उनकी बहन सारा की राज्य से बाहर शादी का हवाला देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में महिलाओं को देश के दूसरे हिस्सों की तरह पुरुषों के बराबर अधिकार नहीं हैं।
उन्होंने कहा था कि कश्मीरी पंडितों ने जो तकलीफें उठाई हैं उनसे कोई भी इनकार नहीं कर सकता। कश्मीर के कुछ समुदायों को जो घाव दिए गए हैं, वे अब भी हरे हैं।