पंजाब में बरनाला ज़िले के महिल कलां गांव में लगा यह बोर्ड ध्यान खींचता है जिस पर लिखा है 'शहीद बीबी किरणजीत कौर मार्ग।' पंजाबी में किसी लड़की या महिला को आदर से बीबी कहा जाता है, लेकिन यह किरणजीत कौन हैं जिन्हें शहीद का दर्जा दिया गया है? महिल कलां और सहिजड़ा गांवों के बीच बनी इस सड़क पर महिल कलां से थोड़ा आगे थाने के सामने से एक कच्चा रास्ता जाता है। इसी रास्ते पर तकरीबन दो किलोमीटर आगे खेतों में किरणजीत कौर का घर बना है।
इसी रास्ते पर रोज़ साइकिल से मास्टर दर्शन सिंह आते-जाते हैं। किरणजीत कौर उन्हीं की बड़ी बेटी का नाम है। किरणजीत कौर उस वक़्त सत्रह साल की थीं जब भारत की आज़ादी की 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही थी और पंजाब में लड़कियों की भ्रूण हत्या पर बहस छिड़ी थी।