जिले में पुलिस महिला अपराधों को भी गंभीरता से नहीं ले रही। थाना क्षेत्र के एक गांव में 13 साल की बच्ची से दुराचार करने के आरोपी के खिलाफ पुलिस ने तहरीर मिलने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़ित परिवार की गुहार पर बुधवार को बिरादरी की भरी पंचायत में आरोपी को पेश किया गया और पांच जूते मारे गए।
इसके बाद मामला रफा-दफा किया जा सका। आरोपी एक राजनीतिक पार्टी का जिलाध्यक्ष है। पुलिस द्वारा इस नाबालिग से दुराचार के मामले में कार्रवाई न करना आरोपी को कानून के चंगुल से बचाने जैसा अपराध है।
थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति एक राजनीतिक पार्टी का जिलाध्यक्ष है। आरोप है कि एक सप्ताह पहले वह 13 साल की नाबालिग को बहला फुसला कर अपने साथ ले गया और उसके साथ दुराचार किया।
गांव के कुछ लोगों ने उसकी इस हरकत को देख लिया। जब आरोपी को पता लगा कि उसके खिलाफ मामले की तहरीर पुलिस को दे दी गई है, तो वह गांव से भाग गया। पुलिस मामले की जांच करने गांव भी पहुंची और पूछताछ करने के बाद वापस हो गई।
राजनीतिक दल के जिलाध्यक्ष ने किया मासूम से दुष्कर्म
तहरीर पर न रिपोर्ट लिखी गई और न आरोपी को पकड़ा गया। आरोपी से सांठगांठ के चलते पुलिस ने जघन्य अपराध में भी चुप्पी साध ली। मामला तूल पकड़ने पर बुधवार को गांव में इस मामले को निपटाने के लिए बिरादरी के लोगों की पंचायत बुलाई गई। पंचायत में आरोपी को भी बुलाया गया। आरोपी बमुश्किल आया।
बताया जा रहा है कि भरी पंचायत में आरोपी को उसके किए की सजा के तौर पर पांच जूते मारे जाने का फरमान सुना दिया गया। इस पर नाबालिग व उसके पिता ने आरोपी को पांच जूते मारे। इसके बाद मामले को रफा दफा कर दिया गया।
हालांकि एसओ सुमन कुमार का कहना है कि दुराचार की तहरीर नहीं दी गई थी। तहरीर में लड़की को मोबाइल देकर बहलाने-फुसलाने का जिक्र था। बाद में मामला आपस में निपट गया। पंचायत के बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है।
रिपोर्ट दर्ज करने के बजाए समझौते करा रही पुलिस
महिला अपराध के मामले में पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने को अपनी तौहीन समझ रही है। जिले में महिला एसपी होने के बाद भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई न हो पाना महिलाओं की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। मंडी धनौरा के एक और मामले में पुलिस लड़की को फोन करके परेशान करने वाले पर कार्रवाई नहीं कर रही है। आरोपी से समझौता कराने का दबाव बना रही है।
अदालत के आदेश पर दर्ज हो रहे केस
महिला अपराध के मामले में अगर जिले के आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 55 ऐसे केस हैं जोकि अदालत के आदेश पर पुलिस ने दर्ज किए हैं। इनमें भी अधिकांश को विवेचना करके खत्म कर दिया गया है।
ऐसे मामलों में गंभीर है कोर्ट
दुराचार के मामलों में पुलिस गंभीर नहीं है। आरोपी को बचाने में पुलिस पूरी मेहनत करती है। जबकि कोर्ट से ऐसे मामलों में सख्ती बराबर की जा रही है। पिछले सप्ताह ही जनपद न्यायाधीश ने एक बच्ची के साथ दुराचार के बाद हत्या में आरोपी को फांसी सजा सुनाई थी। वहीं एएसपी विजय गौतम ने कहा कि रेप का यह मामला संज्ञान में नहीं है। यदि इस गांव में ऐसा हुआ है तो पुलिस को भेजकर आरोपी के खिलाफ दुराचार का मुकदमा लिखकर जेल भेजा जाएगा।