उत्तर प्रदेश में नाबालिग और बालिग लड़कियों से बलात्कार की घटनाओं में साल दर साल इजाफा हो रहा है।
2003 में बलात्कार के कुल अपराधों की संख्या जहां 911 थीं। वहीं पिछले साल 1936 मामले दर्ज किए गए।
जबकि न्यायालय में इन मामलों के निपटारे में थोड़ी गति आई है। क्योंकि अपराधों की संख्या की तुलना में दस साल पहले जहां 4780 मामले लंबित थे। वहीं गत वर्ष 4525 मामले न्यायालय में विचाराधीन रहे।
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राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो की ओर से हाथरस निवासी आरटीआई कार्यकर्ता गौरव अग्रवाल की ओर से मांगी गई।
सूचना के जवाब में कहा है कि तेजाब फेंकने वाली घटनाओं का संकलन ब्यूरो की ओर से नहीं किया जाता है। जबकि बलात्कार की घटनाओं का ब्यौरा 2003 से लेकर 2012 तक का दिया है।
दस वर्षों में राज्य में कुल 15685 बलात्कार की घटनाएं हुईं। इसमें सजा पाने वाले दोषियों और बरी होने वाले अभियुक्तों का अनुपात 50:50 का रहा।
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ब्यूरो ने सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए सवालों के जवाब में यह भी स्पष्ट करने से इंकार कर दिया है कि राज्य के वीआईपी लोगों पर कितना खर्च किया जाता है।
ब्यूरो ने कहा है कि लखनऊ में वीवीआईपी, वीआईपी स्तर की सुरक्षा के संबंध में खर्च के संबंध में सूचना एकत्र नहीं की जाती है।
साथ ही यह भी साफ किया है कि मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित मामलों का विवरण इकट्ठा नहीं किया जाता है। ब्यूरो सिर्फ वही सूचनाएं एकत्र करता है जो पुलिस की ओर से पंजीकृत आपराधिक मामला होता है।